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षट्कर्म और तांत्रिक बाधा प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

षट्कर्म और तांत्रिक बाधा से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

अघोरास्त्र स्तोत्र परविद्या को कैसे नष्ट करता है?

अघोरास्त्र स्तोत्र परविद्या के षट्कर्मों को 'दह छिंदी छिंदी' और 'इति कर्माण वृत्त फट् स्वाहा' से जलाकर और काटकर ध्वस्त कर देता है।

परविद्या छेदनअघोरास्त्रषट्कर्म विनाश
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परविद्या क्या होती है?

परविद्या का अर्थ है दूसरों द्वारा साधक के विरुद्ध किए गए तांत्रिक प्रयोग (काला जादू) — नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र इसे काटने में सबसे प्रभावी है।

परविद्याकाला जादूतांत्रिक प्रयोग
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नीलकंठ स्तोत्र काला जादू से बचाता है क्या?

हाँ, नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र काला जादू (परविद्या) और षट्कर्मों के प्रयोग को 'दह छिंदी छिंदी' से ध्वस्त कर साधक की रक्षा करता है।

काला जादूपरविद्यातांत्रिक बाधा
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स्तोत्र में किन षट्कर्मों का उल्लेख है?

स्तोत्र में स्तम्भन, मोहन, वश्याकर्षण, उच्चाटन, कीलन और द्वेषण — इन छह षट्कर्मों का उल्लेख है जिन्हें स्तोत्र 'दह छिंदी छिंदी' से ध्वस्त करता है।

षट्कर्मस्तम्भनउच्चाटन
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षट्कर्म क्या होते हैं?

षट्कर्म तंत्र के छह प्रमुख कर्म हैं: स्तम्भन, मोहन, वश्याकर्षण, उच्चाटन, कीलन और द्वेषण। नीलकंठ स्तोत्र इन कर्मों के दुष्प्रभाव से रक्षा करता है।

षट्कर्मछह कर्मतांत्रिक
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षट्कर्म और तांत्रिक बाधा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर षट्कर्म और तांत्रिक बाधा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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षट्कर्म और तांत्रिक बाधा को गहराई से समझने का तरीका

षट्कर्म और तांत्रिक बाधा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।