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कर्मकांड प्रश्नोत्तर — 2 प्रश्न

कर्मकांड से जुड़े 2 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 2 प्रश्न

पितृ तर्पण के समय कौन से मंत्रों का उच्चारण करें?

मंत्र: '(नाम) गोत्रः...तृप्यतां इदं तिलोदकं...स्वधा नमः'। सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः'। पितृ गायत्री। दक्षिण मुख, काले तिल+जल, दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ), 3-3 अंजलि। जनेऊ अपसव्य। पितृ पक्ष/अमावस्या। विस्तृत = पुरोहित से सीखें।

तर्पणपितृश्राद्ध
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श्राद्ध कर्म में कौन से वैदिक मंत्रों का प्रयोग होता है?

प्रमुख: पितृ सूक्त (ऋग्वेद 10.15), तर्पण मंत्र ('...स्वधा नमः'), पितृ गायत्री, गायत्री, यम सूक्त। स्वधा = पितरों हेतु (स्वाहा = देवताओं)। दक्षिण मुख, तिल+जल, अपसव्य। विद्वान ब्राह्मण से करवाएं।

श्राद्धवैदिक मंत्रपितृ
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कर्मकांड — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर कर्मकांड श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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कर्मकांड को गहराई से समझने का तरीका

कर्मकांड प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

2 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।