विस्तृत उत्तर
श्राद्ध कर्म = पितरों (मृत पूर्वजों) की तृप्ति हेतु किया जाने वाला कर्मकांड। इसमें कई वैदिक मंत्रों का प्रयोग होता है:
प्रमुख वैदिक मंत्र
1पितृ सूक्त (ऋग्वेद 10.15)
पितरों की स्तुति का प्रमुख वैदिक सूक्त। 'ऊर्जं वहंतीरमृतं घृतं पयः...' — पितरों को ऊर्जा, अमृत, घी, दूध अर्पण।
2तर्पण मंत्र
'(पितर नाम) गोत्रः शर्मा/देवी वसुरूपः/वसुरूपा तृप्यतां इदं तिलोदकं तस्मै/तस्यै स्वधा नमः'
3. गायत्री मंत्र: सार्वभौमिक — श्राद्ध में भी मान्य।
3पितृ गायत्री
'ॐ पितृगणाय विद्महे महास्वधायै धीमहि तन्नो पितरः प्रचोदयात्'
5. स्वधा मंत्र: 'स्वधा नमः' — पितरों के लिए 'स्वधा' = 'स्वाहा' (देवताओं हेतु) के समकक्ष।
6. यम सूक्त: यमराज की स्तुति — पितृलोक अधिपति।
7. विष्णु सहस्रनाम / गीता (अध्याय 2/15): श्राद्ध के दिन पाठ।
श्राद्ध विधि (सरल)
दक्षिण मुख → यज्ञोपवीत अपसव्य (दायें कंधे) → काले तिल + जल → तर्पण → पिंडदान → ब्राह्मण भोजन।
ध्यान रखें: श्राद्ध = विस्तृत कर्मकांड — कुल पुरोहित/विद्वान ब्राह्मण से करवाएं।





