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पितृ तर्पण के समय कौन से मंत्रों का उच्चारण करें?

मंत्र: '(नाम) गोत्रः. . . तृप्यतां इदं तिलोदकं. . . स्वधा नमः'। सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः'। पितृ गायत्री।

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र: '(नाम) गोत्रः...तृप्यतां इदं तिलोदकं...स्वधा नमः'। सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः'। पितृ गायत्री। दक्षिण मुख, काले तिल+जल, दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ), 3-3 अंजलि। जनेऊ अपसव्य। पितृ पक्ष/अमावस्या। विस्तृत = पुरोहित से सीखें।

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विस्तृत उत्तर

पितृ तर्पण (पितरों को जल अर्पण) हिंदू कर्मकांड का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है:

प्रमुख तर्पण मंत्र

1सामान्य पितृ तर्पण मंत्र

'(पितृ/मातृ नाम) गोत्रः/गोत्रा (गोत्र नाम) शर्मा/देवी (नाम) वसुरूपः/वसुरूपा तृप्यतां इदं तिलोदकं तस्मै/तस्यै स्वधा नमः'

2सरल मंत्र

ॐ पितृभ्यो नमः' — प्रत्येक अंजलि (जल) देते समय।
ॐ पिता नमोऽस्तु' — पिता के लिए।
ॐ पितामहाय नमः' — दादा के लिए।
ॐ प्रपितामहाय नमः' — परदादा के लिए।

3पितृ गायत्री

'ॐ पितृगणाय विद्महे महास्वधायै धीमहि तन्नो पितरः प्रचोदयात्'

4. गायत्री मंत्र: सार्वभौमिक — तर्पण में भी मान्य।

तर्पण विधि (सरल)

  1. 1दक्षिण दिशा मुख कर बैठें (पितर = दक्षिण दिशा)।
  2. 2जल में काले तिल मिलाएं।
  3. 3दाहिने हाथ से (अंगूठे की जड़ = पितृ तीर्थ से) जल छोड़ें।
  4. 4प्रत्येक पितर (पिता, दादा, परदादा + माता पक्ष) के लिए 3-3 अंजलि।
  5. 5यज्ञोपवीत (जनेऊ) दाहिने कंधे पर (अपसव्य) रखें।

कब: पितृ पक्ष (भाद्रपद कृष्ण), अमावस्या, श्राद्ध तिथि, सूर्य/चंद्र ग्रहण।

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कब

पितृ पक्ष (भाद्रपद कृष्ण), अमावस्या, श्राद्ध तिथि, सूर्य/चंद्र ग्रहण।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

पितृ तर्पण के समय कौन से मंत्रों का उच्चारण करें को संदर्भ सहित समझें

पितृ तर्पण के समय कौन से मंत्रों का उच्चारण करें का सबसे सीधा सार यह है: मंत्र: '(नाम) गोत्रः...तृप्यतां इदं तिलोदकं...स्वधा नमः'। सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः'। पितृ गायत्री। दक्षिण मुख, काले तिल+जल, दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ), 3-3 अंजलि। जनेऊ अपसव्य। पितृ पक्ष/अमावस्या। विस्तृत =...

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