विस्तृत उत्तर
पितृ तर्पण (पितरों को जल अर्पण) हिंदू कर्मकांड का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है:
प्रमुख तर्पण मंत्र
1सामान्य पितृ तर्पण मंत्र
'(पितृ/मातृ नाम) गोत्रः/गोत्रा (गोत्र नाम) शर्मा/देवी (नाम) वसुरूपः/वसुरूपा तृप्यतां इदं तिलोदकं तस्मै/तस्यै स्वधा नमः'
2सरल मंत्र
ॐ पितृभ्यो नमः' — प्रत्येक अंजलि (जल) देते समय।
ॐ पिता नमोऽस्तु' — पिता के लिए।
ॐ पितामहाय नमः' — दादा के लिए।
ॐ प्रपितामहाय नमः' — परदादा के लिए।
3पितृ गायत्री
'ॐ पितृगणाय विद्महे महास्वधायै धीमहि तन्नो पितरः प्रचोदयात्'
4. गायत्री मंत्र: सार्वभौमिक — तर्पण में भी मान्य।
तर्पण विधि (सरल)
- 1दक्षिण दिशा मुख कर बैठें (पितर = दक्षिण दिशा)।
- 2जल में काले तिल मिलाएं।
- 3दाहिने हाथ से (अंगूठे की जड़ = पितृ तीर्थ से) जल छोड़ें।
- 4प्रत्येक पितर (पिता, दादा, परदादा + माता पक्ष) के लिए 3-3 अंजलि।
- 5यज्ञोपवीत (जनेऊ) दाहिने कंधे पर (अपसव्य) रखें।
कब: पितृ पक्ष (भाद्रपद कृष्ण), अमावस्या, श्राद्ध तिथि, सूर्य/चंद्र ग्रहण।
ध्यान रखें: विस्तृत तर्पण विधि कुल पुरोहित/विद्वान ब्राह्मण से सीखें।





