विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में देव पूजा से भी पहले पितरों (पूर्वजों) की तृप्ति को आवश्यक माना गया है। यदि पितर अतृप्त या नाराज हों, तो परिवार में कलह, वंश वृद्धि में रुकावट और अकारण धन हानि होती है।
पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करने के लिए सबसे सरल और प्रामाणिक मंत्र है 'ॐ सर्व पितृ देवाय नमः'। प्रत्येक अमावस्या, पितृ पक्ष या श्राद्ध के दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक तांबे के पात्र में जल, काले तिल और सफेद पुष्प लेकर इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करते हुए वह जल पृथ्वी पर गिराएं (तर्पण करें)। इसके साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ कर उसका संपूर्ण पुण्य अपने पितरों को अर्पित करने से वे तत्काल तृप्त होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।





