विस्तृत उत्तर
जन्म कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति जीवन में अनेक बाधाएं उत्पन्न करती है। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की शांति के लिए उनके विशिष्ट बीज मंत्रों का जप सबसे प्रभावी उपाय माना गया है, क्योंकि ये ध्वनि तरंगें सीधे उस ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करती हैं।
प्रमुख बीज मंत्र इस प्रकार हैं: सूर्य- 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः', चंद्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः', मंगल- 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः', बुध- 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः', गुरु- 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः', शुक्र- 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः', शनि- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः', राहु- 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः', और केतु- 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः'। इन मंत्रों का जप उस ग्रह के विशिष्ट दिन, उसी ग्रह के रंग के वस्त्र पहनकर करना चाहिए।





