विस्तृत उत्तर
वास्तु दोष और ग्रह दोष का गहरा संबंध माना जाता है क्योंकि वास्तु शास्त्र में प्रत्येक दिशा का स्वामी ग्रह निर्धारित है। नवग्रह पूजा से वास्तु दोष शांति का विधान ज्योतिष और वास्तु दोनों परंपराओं में है।
दिशा और ग्रह संबंध
- ▸पूर्व — सूर्य
- ▸पश्चिम — शनि
- ▸उत्तर — बुध
- ▸दक्षिण — मंगल
- ▸ईशान (उत्तर-पूर्व) — बृहस्पति (गुरु)
- ▸आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) — शुक्र
- ▸नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) — राहु
- ▸वायव्य (उत्तर-पश्चिम) — चंद्रमा
- ▸केंद्र (ब्रह्म स्थान) — केतु
नवग्रह पूजा विधि
- 1संकल्प — वास्तु दोष निवारण हेतु नवग्रह शांति का संकल्प लें।
- 1नवग्रह स्थापना — नवग्रह यंत्र या नवग्रह प्रतिमाएं स्थापित करें। प्रत्येक ग्रह का अपना रंग, अनाज और पुष्प होता है:
- ▸सूर्य — लाल, गेहूं, लाल फूल
- ▸चंद्र — सफेद, चावल, सफेद फूल
- ▸मंगल — लाल, मसूर दाल, लाल फूल
- ▸बुध — हरा, मूंग, हरे फूल
- ▸गुरु — पीला, चना दाल, पीले फूल
- ▸शुक्र — सफेद, सफेद तिल, सफेद फूल
- ▸शनि — काला/नीला, उड़द, नीले/बैंगनी फूल
- ▸राहु — धूम्र, उड़द, नीले फूल
- ▸केतु — भूरा/सप्तरंगी, कुलथी, सप्तरंगी फूल
- 1मंत्र जप — प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र या वैदिक मंत्र जपें।
- 1हवन — नवग्रह समिधा और घी से हवन करें।
- 1दान — प्रत्येक ग्रह से संबंधित वस्तु का दान करें।
विशेष वास्तु दोष और संबंधित ग्रह शांति
- ▸ईशान कोण दोष — बृहस्पति (गुरु) शांति
- ▸आग्नेय कोण दोष — शुक्र शांति
- ▸दक्षिण दोष — मंगल शांति
- ▸पश्चिम दोष — शनि शांति
व्यावहारिक सुझाव
- ▸नवग्रह पूजा किसी योग्य ज्योतिषी/पंडित से कराएं।
- ▸जन्म कुंडली के अनुसार पीड़ित ग्रह की विशेष शांति कराना अधिक प्रभावी है।
- ▸पूजा के साथ-साथ वास्तु में संभव संरचनात्मक सुधार भी करें।





