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मंत्र सिद्धि📜 वृहत्पाराशर होराशास्त्र, याज्ञवल्क्य स्मृति, नवग्रह पूजन विधि (अग्निपुराण), सूर्य पुराण, भविष्य पुराण2 मिनट पठन

नवग्रह मंत्र सिद्धि कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

ग्रह-अनुसार मंत्र, वार, और पुष्प: सूर्य (रविवार, लाल), चंद्र (सोमवार, सफेद), शनि (शनिवार, तिल)। व्यक्तिगत ग्रह-शांति: कुंडली में दोषकारक ग्रह का पुरश्चरण। सम्पूर्ण नवग्रह: प्रत्येक का 108 जप एक बैठक में। कुंडली-विश्लेषण के बिना ग्रह-साधना अनुचित।

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विस्तृत उत्तर

नवग्रह मंत्र सिद्धि — ज्योतिषशास्त्र और मंत्रविज्ञान का संयोग:

नवग्रह और उनके मूल मंत्र (वैदिक — अग्निपुराण)

  1. 1सूर्य: 'ॐ हां ह्रीं हौं सः सूर्याय नमः' — रविवार, लाल पुष्प
  2. 2चंद्र: 'ॐ सों सोमाय नमः' — सोमवार, सफेद पुष्प, दूध
  3. 3मंगल: 'ॐ अं अंगारकाय नमः' — मंगलवार, लाल पुष्प
  4. 4बुध: 'ॐ बुं बुधाय नमः' — बुधवार, हरे पुष्प
  5. 5बृहस्पति: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' — गुरुवार, पीले पुष्प
  6. 6शुक्र: 'ॐ शुं शुक्राय नमः' — शुक्रवार, सफेद/क्रीम पुष्प
  7. 7शनि: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' — शनिवार, नीले/काले पुष्प, तिल
  8. 8राहु: 'ॐ रां राहवे नमः' — शनिवार, नीले पुष्प
  9. 9केतु: 'ॐ कें केतवे नमः' — मंगलवार, मिश्रित पुष्प

सिद्धि की विधि

1व्यक्तिगत ग्रह-साधना (जन्म-पत्रिका के आधार पर)

वृहत्पाराशर होराशास्त्र: जन्म-कुंडली में जो ग्रह दोषकारक या कमजोर हो — उस ग्रह के मंत्र का पुरश्चरण करें। यह ग्रह-शांति का प्रामाणिक मार्ग है।

2सम्पूर्ण नवग्रह जप

प्रत्येक ग्रह के मंत्र का 108 या 1008 जप — एक ही बैठक में — 'नवग्रह पूजन'।

3ग्रह-अनुसार पुरश्चरण संख्या (अग्निपुराण)

  • सूर्य: 7,000 जप (नित्य)
  • चंद्र: 11,000 जप
  • मंगल: 10,000 जप
  • बुध: 9,000 जप
  • बृहस्पति: 19,000 जप
  • शुक्र: 16,000 जप
  • शनि: 23,000 जप
  • राहु: 18,000 जप
  • केतु: 17,000 जप

*(यह एकल अनुष्ठान के लिए न्यूनतम परंपरागत संख्याएं हैं।)*

4ग्रह-अनुसार उचित काल

प्रत्येक ग्रह के वार पर उस ग्रह का जप — जैसे सूर्य → रविवार, शनि → शनिवार।

5हवन सामग्री — ग्रह-अनुसार

सूर्य: मधु/गेहूं, चंद्र: खीर, मंगल: खैर/गुड़, शनि: तिल/सरसों।

महत्वपूर्ण

केवल मंत्र-जप पर्याप्त नहीं — ग्रह-शांति के लिए अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली-विश्लेषण अनिवार्य। अनुचित ग्रह का मंत्र जपने से लाभ नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
वृहत्पाराशर होराशास्त्र, याज्ञवल्क्य स्मृति, नवग्रह पूजन विधि (अग्निपुराण), सूर्य पुराण, भविष्य पुराण
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