विस्तृत उत्तर
नवग्रह मंत्र सिद्धि — ज्योतिषशास्त्र और मंत्रविज्ञान का संयोग:
नवग्रह और उनके मूल मंत्र (वैदिक — अग्निपुराण)
- 1सूर्य: 'ॐ हां ह्रीं हौं सः सूर्याय नमः' — रविवार, लाल पुष्प
- 2चंद्र: 'ॐ सों सोमाय नमः' — सोमवार, सफेद पुष्प, दूध
- 3मंगल: 'ॐ अं अंगारकाय नमः' — मंगलवार, लाल पुष्प
- 4बुध: 'ॐ बुं बुधाय नमः' — बुधवार, हरे पुष्प
- 5बृहस्पति: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' — गुरुवार, पीले पुष्प
- 6शुक्र: 'ॐ शुं शुक्राय नमः' — शुक्रवार, सफेद/क्रीम पुष्प
- 7शनि: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' — शनिवार, नीले/काले पुष्प, तिल
- 8राहु: 'ॐ रां राहवे नमः' — शनिवार, नीले पुष्प
- 9केतु: 'ॐ कें केतवे नमः' — मंगलवार, मिश्रित पुष्प
सिद्धि की विधि
1व्यक्तिगत ग्रह-साधना (जन्म-पत्रिका के आधार पर)
वृहत्पाराशर होराशास्त्र: जन्म-कुंडली में जो ग्रह दोषकारक या कमजोर हो — उस ग्रह के मंत्र का पुरश्चरण करें। यह ग्रह-शांति का प्रामाणिक मार्ग है।
2सम्पूर्ण नवग्रह जप
प्रत्येक ग्रह के मंत्र का 108 या 1008 जप — एक ही बैठक में — 'नवग्रह पूजन'।
3ग्रह-अनुसार पुरश्चरण संख्या (अग्निपुराण)
- ▸सूर्य: 7,000 जप (नित्य)
- ▸चंद्र: 11,000 जप
- ▸मंगल: 10,000 जप
- ▸बुध: 9,000 जप
- ▸बृहस्पति: 19,000 जप
- ▸शुक्र: 16,000 जप
- ▸शनि: 23,000 जप
- ▸राहु: 18,000 जप
- ▸केतु: 17,000 जप
*(यह एकल अनुष्ठान के लिए न्यूनतम परंपरागत संख्याएं हैं।)*
4ग्रह-अनुसार उचित काल
प्रत्येक ग्रह के वार पर उस ग्रह का जप — जैसे सूर्य → रविवार, शनि → शनिवार।
5हवन सामग्री — ग्रह-अनुसार
सूर्य: मधु/गेहूं, चंद्र: खीर, मंगल: खैर/गुड़, शनि: तिल/सरसों।
महत्वपूर्ण
केवल मंत्र-जप पर्याप्त नहीं — ग्रह-शांति के लिए अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली-विश्लेषण अनिवार्य। अनुचित ग्रह का मंत्र जपने से लाभ नहीं।





