विस्तृत उत्तर
भैरव मंत्र सिद्धि — शिव के उग्र रूप भैरव की साधना:
भैरव के प्रमुख मंत्र
- 1बटुकभैरव: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।' — संकट-निवारण के लिए
- 2कालभैरव: 'ॐ हूं भैरवाय नमः' — सामान्य उपासना
- 3अष्टभैरव मंत्र: विशेष दीक्षा के बाद
भैरव सिद्धि की विधि (रुद्रयामल + काशीखंड)
1गुरु-दीक्षा — अनिवार्य
भैरव तंत्र: भैरव उग्र देवता हैं — बिना गुरु के भैरव-साधना से मानसिक अस्थिरता संभव। केवल अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में करें।
2उचित काल
- ▸रविवार — भैरव का वार
- ▸अष्टमी (कृष्ण पक्ष) — कालाष्टमी — वर्ष में 12 कालाष्टमियाँ भैरव-उपासना के लिए
- ▸महाकाल अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी) — सर्वोत्तम
- ▸अर्धरात्रि — नित्य जप के लिए
3स्थान
काशीखंड: काशी (वाराणसी) में भैरव-साधना अत्यंत शक्तिशाली — काल भैरव वहाँ के क्षेत्रपाल हैं। अन्यत्र — शिव मंदिर या एकांत।
4वस्त्र और माला
- ▸काले या गेरुए वस्त्र
- ▸रुद्राक्ष माला
5ध्यान-रूप
कालभैरव — कृष्णवर्ण, त्रिनेत्र, भयंकर रूप, डमरू, त्रिशूल, खप्पर, और श्वान-वाहन — का ध्यान। परंतु बटुकभैरव का रूप सौम्य है।
6पुरश्चरण
'ॐ हूं भैरवाय नमः' (6 अक्षर) → 6 लाख जप
7भोग
तेल में भुने हुए उड़द, सरसों के तेल का दीपक, काले तिल — भैरव को प्रिय।
भैरव-सिद्धि का फल
भैरव तंत्र: सिद्ध भैरव-साधक को न भूत-प्रेत बाधा होती है, न शत्रु-भय। क्षेत्र-रक्षण और संकट-निवारण में शीघ्र फल।
चेतावनी
भैरव 'वीर' देवता हैं। जिज्ञासा या प्रयोग के लिए साधना न करें।





