विस्तृत उत्तर
गुरु मंत्र सिद्धि — सभी मंत्र-साधनाओं में सर्वोच्च और अनोखी साधना:
गुरु मंत्र क्या है
गुरु-दीक्षा के समय जो मंत्र गुरु शिष्य को कान में देते हैं — वह 'गुरु मंत्र' है। यह प्रत्येक शिष्य के लिए अलग हो सकता है। गुरु की परंपरा, शिष्य की पात्रता, और देवता के अनुसार चुना जाता है।
कुलार्णव तंत्र (14.5) — गुरु मंत्र का माहात्म्य
गुरुदत्तो मंत्रो गुरुमंत्रः स उच्यते।
तस्य सिद्धिः स्वयं देवो गुरुः करोति साधकम्।।'
— गुरु द्वारा दिया गया मंत्र 'गुरु मंत्र' है। उसकी सिद्धि स्वयं देव-गुरु करते हैं — साधक को केवल निष्ठा चाहिए।
गुरु मंत्र सिद्धि की विशेषता
1सिद्धि का सरलतम मार्ग
गुरुगीता (स्कंद पुराण): 'गुरुकृपा मात्रेण सर्वसिद्धिः।' — गुरु की कृपा से सभी सिद्धियाँ स्वतः आती हैं। गुरु मंत्र अन्य मंत्रों की तुलना में शीघ्र सिद्ध होता है — क्योंकि इसमें गुरु-शक्ति पहले से स्थापित है।
2सिद्धि की विधि
- ▸गुरु-दिए मंत्र को गुरु-निर्देशित संख्या में नित्य जपें
- ▸जप के समय गुरु का ध्यान करें — गुरु और इष्टदेव में भेद न करें
- ▸गुरुपूर्णिमा पर विशेष जप और गुरु-पूजन
3गुरु-भक्ति — सिद्धि का मूल
तंत्रालोक: 'श्रद्धा भक्ति च गुरौ।' — गुरु में श्रद्धा और भक्ति — यह गुरु मंत्र की सिद्धि का सबसे बड़ा रहस्य है। मंत्र की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण गुरु के प्रति समर्पण है।
4गुरु मंत्र में पुरश्चरण
कुलार्णव: गुरु-निर्देशित संख्या में जप — यह पुरश्चरण है। बाहरी शास्त्रों की संख्या से नहीं, गुरु-आज्ञा से चलें।
5गुरु-आज्ञा पालन
तैत्तिरीय उपनिषद: 'आचार्यदेवो भव।' — गुरु की आज्ञा पालन ही सिद्ध साधक का लक्षण है।
गुरु मंत्र और अन्य मंत्रों में अंतर
गुरु-दत्त मंत्र में गुरु-परंपरा की सिद्ध-शक्ति होती है — यह 'जीवित मंत्र' है। स्वतः लिया गया मंत्र 'निर्जीव' होता है।
यदि सद्गुरु न मिले
शास्त्र कहते हैं — इष्टदेव को ही गुरु मानकर, उनके किसी मंत्र का गुरु-भाव से जप करें। यह 'दिव्य गुरु' साधना है।





