विस्तृत उत्तर
भगवान धनवंतरि देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। जब कोई बीमारी असाध्य हो जाए और दवाइयां असर न कर रही हों, तो भगवान धनवंतरि की शरण में जाना चाहिए। वे समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
रोग मुक्ति का सबसे शक्तिशाली मंत्र है 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रैलोक्यपतये त्रैलोक्यनिधये श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धन्वन्तरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः'। रोगी स्वयं या परिवार का कोई सदस्य तुलसी की माला से इस मंत्र का प्रतिदिन जप कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि रोगी को कोई भी औषधि (दवा) खाने या पीने से ठीक पहले इस मंत्र का मानसिक स्मरण अवश्य करना चाहिए, जिससे वह दवा अमृत के समान कार्य करती है और रोग शीघ्र नष्ट होता है।





