विस्तृत उत्तर
नवग्रह शांति पूजा ग्रह दोषों के निवारण और ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने हेतु की जाती है।
नवग्रह: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
पूजा की विधि
- 1संकल्प: ज्योतिषीय परामर्श से कौन-सा ग्रह दोषपूर्ण है, यह निर्धारित करें। सर्वग्रह शांति या विशेष ग्रह शांति का संकल्प लें।
- 1कलश स्थापना: प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग रंग के वस्त्र से कलश स्थापित किए जाते हैं।
- 1नवग्रह मण्डल स्थापना: नवग्रहों की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें। मध्य में सूर्य, और अन्य आठ ग्रह अपने-अपने दिशा स्थान पर। प्रत्येक ग्रह के अनाज से उनका स्थान सजाएँ (सूर्य-गेहूँ, चन्द्र-चावल, मंगल-मसूर, बुध-मूँग, गुरु-चना, शुक्र-सफेद तिल, शनि-काले तिल/उड़द, राहु-सरसों, केतु-कुल्थी)।
- 1प्रत्येक ग्रह का पूजन: फूल, अक्षत, धूप, दीप से विधिवत पूजन। प्रत्येक ग्रह का अपना मंत्र और बीज मंत्र।
- 1नवग्रह स्तोत्र पाठ: 'जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्...' नवग्रह स्तोत्र का पाठ।
- 1हवन: प्रत्येक ग्रह की निर्धारित समिधा और आहुति सामग्री से हवन। सूर्य — मदार, चन्द्र — पलाश, मंगल — खैर, बुध — अपामार्ग, गुरु — पीपल, शुक्र — गूलर, शनि — शमी, राहु — दूर्वा, केतु — कुशा।
- 1जप संख्या: प्रत्येक ग्रह मंत्र की निर्धारित संख्या में जप — सूर्य 7000, चन्द्र 11000, मंगल 10000, बुध 9000, गुरु 19000, शुक्र 16000, शनि 23000, राहु 18000, केतु 17000।
- 1दान: प्रत्येक ग्रह से सम्बंधित वस्तु का दान — सूर्य: गेहूँ-गुड़, चन्द्र: चावल-दूध, शनि: काला तिल-सरसों तेल आदि।
विशेष: नवग्रह पूजा अनुभवी पुरोहित से ही करवानी चाहिए। कुंडली में विशेष ग्रह दोष होने पर विशेष ग्रह की अलग शांति भी करवाई जा सकती है।





