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पुण्यकाल प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

पुण्यकाल से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

विभिन्न ग्रहों के संक्रमण का पुण्यकाल कितना होता है?

काल निर्णय/हेमाद्रि: सूर्य = ±6 घंटे 24 मिनट; चंद्र = ±29 मिनट; मंगल/शुक्र = ±1 घंटा 36 मिनट; बुध = ±1 घंटा 17 मिनट; गुरु = ±1 घंटा 50 मिनट; शनि = ±32 घंटे 48 मिनट।

ग्रह संक्रमण पुण्यकालशनि गुरु बुधकाल निर्णय
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मकर और कर्क संक्रांति का पुण्यकाल अन्य संक्रांतियों से अलग क्यों है?

हेमाद्रि और माधव: अन्य संक्रांतियाँ रात्रि में हो तो पुण्यकाल अगले दिन जाता है। परंतु मकर (उत्तरायण) और कर्क (दक्षिणायन) संक्रांति का पुण्यकाल रात्रि में भी पूरे दिन मान्य — क्योंकि ये उत्तरायण/दक्षिणायन के प्रारंभ = ब्रह्मांडीय महत्त्व।

मकर कर्क संक्रांतिउत्तरायण दक्षिणायनविशेष माहात्म्य
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रात को मकर संक्रांति हो तो पूजा कब करें?

भविष्य पुराण: संक्रांति के दिन रात्रि में भी स्नान और दान किया जा सकता है — यह अपवाद है। हेमाद्रि और माधव: मकर संक्रांति (उत्तरायण) रात्रि में हो तो भी पुण्यकाल पूरे दिन मान्य रहता है। अन्य संक्रांतियाँ अगले दिन स्थानांतरित।

रात्रि संक्रमणभविष्य पुराणअपवाद
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पुण्यकाल की घटी और समय की गणना कैसे होती है?

1 घटी = 24 मिनट। विभिन्न ग्रहों का पुण्यकाल: सूर्य = ±6 घंटे 24 मिनट; चंद्र = ±29 मिनट; मंगल/शुक्र = ±1 घंटा 36 मिनट; बुध = ±1 घंटा 17 मिनट; गुरु = ±1 घंटा 50 मिनट; शनि = ±32 घंटे 48 मिनट।

घटी गणनापलविभिन्न ग्रह
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मकर संक्रांति का पुण्यकाल कितने समय का होता है?

काल निर्णय: पुण्यकाल = संक्रमण से 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) पूर्व + 16 घटी पश्चात् = कुल 32 घटी (लगभग 12 घंटे 48 मिनट)। 1 घटी = 24 मिनट। हेमाद्रि: 12 दिन पूर्व भी पुण्यकाल। 3,4,5,7,8,9,12 घटी = 'पुण्य-तम'।

पुण्यकाल16 घटी6 घंटे 24 मिनट
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पुण्यकाल — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पुण्यकाल श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

पुण्यकाल को गहराई से समझने का तरीका

पुण्यकाल प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।