विस्तृत उत्तर
प्राचीन ग्रंथों तथा 'काल निर्णय' के अनुसार, सूर्य संक्रांति के लिए संक्रमण से सोलह घटी (लगभग छह घंटे चौबीस मिनट) पूर्व और सोलह घटी पश्चात् का समय अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। एक घटी में चौबीस मिनट होते हैं, इस प्रकार बत्तीस घटी का यह विस्तृत समय-अंतराल पूजा, जप और दान के लिए सर्वोत्तम होता है।
हेमाद्रि' के धर्मशास्त्रीय उल्लेखानुसार, मकर संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के दिन से बारह दिन पूर्व भी उपस्थित हो सकता है, परंतु अनुष्ठानिक दृष्टि से प्रत्यक्ष संक्रमण के इर्द-गिर्द का समय ही सर्वमान्य और व्यावहारिक माना गया है।
संक्रांति के अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण तीस घटी के समग्र कालखंड को अनुष्ठान-योग्य माना गया है, जिसमें से तीन, चार, पांच, सात, आठ, नौ या बारह घटी के विशिष्ट खण्डों को 'पुण्य-तम' (सर्वाधिक शुभ) की श्रेणी में रखा गया है।
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