विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के समय का विशेष महत्व बताया गया है। दान का फल उचित समय पर दिए जाने से बहुगुना हो जाता है।
जीवन में ही दान — गरुड़ पुराण का सर्वोपरि संदेश है — 'जीवित रहते दान-कर्म और धर्म का संग्रह करें।' जो जीवन में दान करता है, वह यममार्ग पर उसका फल पाता है।
पुण्यकाल — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में पुण्यकाल बताए गए हैं — 'कार्तिक आदि शुभ महीनों में, सूर्य के उत्तरायण होने पर, शुक्लपक्ष की तिथियों में, सूर्य-चन्द्र के ग्रहणकाल में, पवित्र तीर्थ में, दोनों अयन-संक्रांतियों में।'
संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या — ये विशेष पुण्यकाल हैं जिनमें दान का फल असंख्य गुना बढ़ जाता है।
पितृपक्ष — श्राद्ध-पक्ष (भाद्रपद कृष्ण पक्ष) में किया गया दान पितरों और प्रेत-आत्माओं के लिए विशेष लाभकारी है।
मृत्यु के समय — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के समय का दान हजार गुना फल देता है।
सदैव — 'तत्त्वदर्शी मुनियों ने कहा है — दान सदा देना चाहिए, कोई भी समय अपात्र नहीं।'





