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पुण्यकाल — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3 प्रश्न

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ग्रहण विधि

ग्रहण काल में दान करने से पुण्य कई गुना क्यों बढ़ता है?

ग्रहण दान: पुण्यकाल (करोड़गुना — स्मृति), सन्धि काल=कर्मफल तीव्र, अशुद्धि में त्याग=अधिक पुण्य। तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा/चाँदी। ग्रहण मोक्ष समय सर्वोत्तम।

ग्रहण दानपुण्यकोटिगुण
ग्रहण विधि

ग्रहण के बाद स्नान और दान कैसे करें?

ग्रहण बाद: तुरंत स्नान (गंगाजल+तिल+कुश) → दान (अनंतगुना फल — तिल, अन्न, वस्त्र, धातु) → गृह शुद्धि (गंगाजल छिड़काव) → पूजा → तुलसी सहित ताजा भोजन। पुराना भोजन त्यागें। सूर्य ग्रहण: ताम्बा-गेहूँ दान। चन्द्र: चाँदी-चावल।

ग्रहण स्नानग्रहण दानमोक्ष स्नान
त्योहार पूजा

मकर संक्रांति पर दान करने का शास्त्रीय विधान क्या है?

मकर संक्रांति दान: पुण्यकाल (संक्रांति ±6.5 घण्टे) में। क्रम: तिल स्नान → सूर्य अर्घ्य → दान। सामग्री: तिल (सर्वोत्तम), गुड़, खिचड़ी, गर्म वस्त्र, अन्न, गोदान। पितर तर्पण। गंगा स्नान-दान विशेष। भीष्म = उत्तरायण महत्व। दान अक्षय फल।

मकर संक्रांति दानतिल दानउत्तरायण दान

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।