विस्तृत उत्तर
ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) के बाद स्नान और दान अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म हैं।
ग्रहण मोक्ष स्नान
- 1ग्रहण समाप्त होते ही (मोक्ष काल) तुरंत स्नान करें।
- 2जल में गंगाजल, तिल, और कुश मिलाकर स्नान उत्तम।
- 3नदी/सरोवर में स्नान सर्वश्रेष्ठ। घर पर भी कर सकते हैं।
- 4स्नान मंत्र: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।'
- 5स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
ग्रहण दान
- 1ग्रहण मोक्ष के तुरंत बाद दान करें — इस समय का दान अनंतगुना फल देता है।
- 2दान सामग्री: काले तिल, अन्न, वस्त्र, स्वर्ण/रजत (यथाशक्ति), गाय, ताम्बे का पात्र, फल, दक्षिणा।
- 3विशेष दान: सूर्य ग्रहण में — गेहूँ, गुड़, ताम्बा, लाल वस्त्र। चन्द्र ग्रहण में — चावल, दूध, चाँदी, श्वेत वस्त्र।
- 4ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान दें।
ग्रहण के बाद पूजा
- 1स्नान-दान के बाद भगवान की पूजा करें।
- 2घर में गंगाजल छिड़कें — ग्रहणकालीन अशुद्धि दूर करने के लिए।
- 3तुलसी पत्र सहित भोजन बनाएँ और ग्रहण करें।
विशेष: ग्रहण काल में जो भोजन पहले से बना था, उसे त्याग दें। ग्रहण के बाद ताजा भोजन बनाएँ। दूध, दही, अचार आदि में पहले से तुलसी पत्र डाल दें तो वे अशुद्ध नहीं होते।





