का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण में दान जीवन में ही देने को श्रेष्ठ बताया है। पुण्यकाल — संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या, पितृपक्ष, तीर्थ — में दान का फल बहुगुना होता है। मृत्युकाल में दान हजार गुना फल देता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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