विस्तृत उत्तर
सामान्यतः 'पराशर स्मृति' और 'विष्णुधर्मसूत्र' जैसे धर्मशास्त्रों में रात्रि के समय स्नान और दान का कड़ाई से निषेध किया गया है। परंतु 'भविष्य पुराण' इस नियम का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अपवाद प्रस्तुत करता है।
भविष्य पुराण' यह स्पष्ट करता है कि ग्रहण, विवाह, संक्रांति, यात्रा, जनन (सूतक) और मरण के समय तथा इतिहास-श्रवण के काल में रात्रि में भी स्नान और दान किया जा सकता है।
यदि मकर संक्रांति का संक्रमण रात्रि में होता है, तो 'हेमाद्रि' और 'माधव' के विवेचन के अनुसार मकर संक्रांति (उत्तरायण) और कर्क संक्रांति (दक्षिणायन) के विशेष माहात्म्य के कारण इनका पुण्यकाल रात्रि में होने पर भी दिन भर मान्य रहता है।
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