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विस्तृत उत्तर
भविष्य पुराण और यमस्मृति में श्राद्ध के 12 प्रकार बताए गए हैं: नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि या नान्दीमुख, सपिण्डन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धर्थ, कर्मांग, दैविक, यात्रार्थ और पुष्ट्यर्थ। ये प्रकार बताते हैं कि श्राद्ध केवल पितृ पक्ष का वार्षिक कर्म नहीं, बल्कि दैनिक, विशेष अवसरों, मांगलिक कार्यों, यात्रा, शुद्धि और पुष्टिकर उद्देश्यों से भी जुड़ा हुआ शास्त्रीय तंत्र है।
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