विस्तृत उत्तर
शिव के अष्टमूर्ति (आठ मूर्ति/रूप) का वर्णन अनेक ग्रंथों में है:
प्रमुख ग्रंथ
1भविष्य पुराण (मुख्य स्रोत — भारतकोश)
भविष्य पुराण में शिव की आठ मूर्तियां बताई गई हैं:
- 1पृथ्वी (शर्व)
- 2जल (भव)
- 3तेज/अग्नि (रुद्र)
- 4वायु (उग्र)
- 5आकाश (भीम)
- 6यजमान/आत्मा (पशुपति)
- 7सोम/चंद्र (महादेव)
- 8सूर्य (ईशान)
2अभिज्ञानशाकुंतलम् (कालिदास)
महाकवि कालिदास ने अपने प्रसिद्ध नाटक 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' के नांदी श्लोक में शिव के अष्टमूर्ति रूप का उल्लेख किया है — यह संस्कृत साहित्य में अष्टमूर्ति का सबसे प्रसिद्ध संदर्भ है।
3शैव सिद्धांत (भारतकोश)
शैव सिद्धांत में अष्टमूर्ति के भिन्न नाम: शिव, भैरव, श्रीकंठ, सदाशिव, ईश्वर, रुद्र, विष्णु, ब्रह्मा।
अर्थ
शिव ब्रह्मांड के पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) + सूर्य + चंद्र + आत्मा — इन आठ तत्वों में व्याप्त हैं। 'अष्टमूर्ति' = शिव सर्वव्यापी हैं, ब्रह्मांड का प्रत्येक तत्व शिव का रूप है।
News Track शोध: आधिभौतिक रूद्र में प्रथम आठ (पृथ्वी-जल-तेज-वायु-आकाश-सूर्य-चंद्र-यजमान) शिव की अष्टमूर्ति कहलाते हैं।





