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शिव दर्शन📜 भविष्य पुराण, अभिज्ञानशाकुंतल (कालिदास), भारतकोश, Webdunia, शैव सिद्धांत2 मिनट पठन

शिव के अष्टमूर्ति रूपों का वर्णन किस ग्रंथ में है?

संक्षिप्त उत्तर

भविष्य पुराण: 8 मूर्तियां — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, यजमान(आत्मा), चंद्र, सूर्य। कालिदास 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' नांदी श्लोक = सबसे प्रसिद्ध संदर्भ। अर्थ: शिव ब्रह्मांड के 8 तत्वों में सर्वव्यापी।

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विस्तृत उत्तर

शिव के अष्टमूर्ति (आठ मूर्ति/रूप) का वर्णन अनेक ग्रंथों में है:

प्रमुख ग्रंथ

1भविष्य पुराण (मुख्य स्रोत — भारतकोश)

भविष्य पुराण में शिव की आठ मूर्तियां बताई गई हैं:

  1. 1पृथ्वी (शर्व)
  2. 2जल (भव)
  3. 3तेज/अग्नि (रुद्र)
  4. 4वायु (उग्र)
  5. 5आकाश (भीम)
  6. 6यजमान/आत्मा (पशुपति)
  7. 7सोम/चंद्र (महादेव)
  8. 8सूर्य (ईशान)

2अभिज्ञानशाकुंतलम् (कालिदास)

महाकवि कालिदास ने अपने प्रसिद्ध नाटक 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' के नांदी श्लोक में शिव के अष्टमूर्ति रूप का उल्लेख किया है — यह संस्कृत साहित्य में अष्टमूर्ति का सबसे प्रसिद्ध संदर्भ है।

3शैव सिद्धांत (भारतकोश)

शैव सिद्धांत में अष्टमूर्ति के भिन्न नाम: शिव, भैरव, श्रीकंठ, सदाशिव, ईश्वर, रुद्र, विष्णु, ब्रह्मा।

अर्थ

शिव ब्रह्मांड के पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) + सूर्य + चंद्र + आत्मा — इन आठ तत्वों में व्याप्त हैं। 'अष्टमूर्ति' = शिव सर्वव्यापी हैं, ब्रह्मांड का प्रत्येक तत्व शिव का रूप है।

News Track शोध: आधिभौतिक रूद्र में प्रथम आठ (पृथ्वी-जल-तेज-वायु-आकाश-सूर्य-चंद्र-यजमान) शिव की अष्टमूर्ति कहलाते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
भविष्य पुराण, अभिज्ञानशाकुंतल (कालिदास), भारतकोश, Webdunia, शैव सिद्धांत
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