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शिव दर्शन📜 शिव पुराण (उमा संहिता), श्वेताश्वतर उपनिषद्, शैव सिद्धांत2 मिनट पठन

शिव की उपासना से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?

संक्षिप्त उत्तर

श्वेताश्वतर उपनिषद्: 'तमेव विदित्वा अतिमृत्युमेति' — शिव को जानकर मृत्यु से पार। मार्ग: ज्ञान ('शिवोऽहम्'), भक्ति ('ॐ नमः शिवाय'), योग (कुंडलिनी→सहस्रार), कर्म (निष्काम+शिवार्पण)। काशी मृत्यु = शिव तारक मंत्र = मोक्ष।

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विस्तृत उत्तर

शिव पुराण और शैव दर्शन में शिव उपासना से मोक्ष प्राप्ति का स्पष्ट विधान है:

शिव पुराण (उमा संहिता)

शिव ज्ञान' (शिव तत्त्व का बोध) = मोक्ष। जो शिव को जान लेता है, वह जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्त हो जाता है।

श्वेताश्वतर उपनिषद्

तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय' — 'उसे (शिव/ब्रह्म को) जानकर ही मृत्यु से पार जाता है, अन्य कोई मार्ग नहीं।

मोक्ष के मार्ग (शैव सिद्धांत)

1ज्ञान मार्ग

शिव = निराकार ब्रह्म। 'शिवोऽहम्' (मैं शिव हूं) — आत्मा और परमात्मा की एकता का बोध = मोक्ष। अद्वैत दर्शन (शंकराचार्य)।

2भक्ति मार्ग

शिव पुराण: सच्ची भक्ति से शिव प्रसन्न होकर भक्त को मोक्ष प्रदान करते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जप — शिव सायुज्य (शिव में विलय) प्राप्ति।

3योग मार्ग

कुंडलिनी जागरण — मूलाधार से सहस्रार (शिव) तक। शक्ति जब शिव से मिलती है = समाधि = मोक्ष।

4कर्म मार्ग

निष्काम कर्म + शिव अर्पण = कर्म बंधन से मुक्ति।

शिव पुराण के अनुसार मोक्ष के साधन

  • शिव कथा श्रवण।
  • शिवलिंग पूजा।
  • 'ॐ नमः शिवाय' जप।
  • शिव मंदिर में दर्शन।
  • शिव भक्तों की सेवा।
  • काशी में मृत्यु (शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं)।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (उमा संहिता), श्वेताश्वतर उपनिषद्, शैव सिद्धांत
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