विस्तृत उत्तर
शिव पुराण और शैव दर्शन में शिव उपासना से मोक्ष प्राप्ति का स्पष्ट विधान है:
शिव पुराण (उमा संहिता)
शिव ज्ञान' (शिव तत्त्व का बोध) = मोक्ष। जो शिव को जान लेता है, वह जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्त हो जाता है।
श्वेताश्वतर उपनिषद्
तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय' — 'उसे (शिव/ब्रह्म को) जानकर ही मृत्यु से पार जाता है, अन्य कोई मार्ग नहीं।
मोक्ष के मार्ग (शैव सिद्धांत)
1ज्ञान मार्ग
शिव = निराकार ब्रह्म। 'शिवोऽहम्' (मैं शिव हूं) — आत्मा और परमात्मा की एकता का बोध = मोक्ष। अद्वैत दर्शन (शंकराचार्य)।
2भक्ति मार्ग
शिव पुराण: सच्ची भक्ति से शिव प्रसन्न होकर भक्त को मोक्ष प्रदान करते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जप — शिव सायुज्य (शिव में विलय) प्राप्ति।
3योग मार्ग
कुंडलिनी जागरण — मूलाधार से सहस्रार (शिव) तक। शक्ति जब शिव से मिलती है = समाधि = मोक्ष।
4कर्म मार्ग
निष्काम कर्म + शिव अर्पण = कर्म बंधन से मुक्ति।
शिव पुराण के अनुसार मोक्ष के साधन
- ▸शिव कथा श्रवण।
- ▸शिवलिंग पूजा।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' जप।
- ▸शिव मंदिर में दर्शन।
- ▸शिव भक्तों की सेवा।
- ▸काशी में मृत्यु (शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं)।





