📖
विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति के स्नान, दान और व्रत का अधिकार समाज के प्रत्येक वर्ण, आयु और लिंग के व्यक्ति को है।
भविष्य पुराण' स्पष्ट करता है कि वेदज्ञ ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक सभी को संक्रांति के अवसर पर अपनी क्षमता अनुसार मन्त्र-सहित या मन्त्र-रहित स्नान-दान करने का पूर्ण अधिकार है।
महिलाएँ विशेष रूप से सुहाग-सामग्री, मिट्टी या पीतल के पात्र, कुमकुम, हल्दी और अन्नादि का दान कर सकती हैं।
इस पर्व की सार्वभौमिकता इसे हिंदू समाज का सबसे समरस और समावेशी पर्व बनाती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





