विस्तृत उत्तर
मनुस्मृति के अनुसार इस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। धार्मिक कारण यह है कि यह दिन मृत पितरों (श्राद्ध) को समर्पित है, इसलिए इसे जन्म (रति) की प्रक्रिया से नहीं मिलाना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टि से, चंद्रमा की अनुपस्थिति के कारण शरीर में जल तत्त्व और मानसिक संतुलन अस्थिर रहता है। इस दिन गर्भाधान होने पर उत्पन्न संतान शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर हो सकती है।





