विस्तृत उत्तर
सरस्वती पूजा के दिन एक अत्यंत विशिष्ट और मनोवैज्ञानिक नियम लागू होता है जिसे 'अनध्याय' (Anadhyayana - No Study) कहा जाता है।
चूँकि इस दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकें, कलम और विद्या के उपकरणों को माँ सरस्वती के साक्षात विग्रह के रूप में पूजा वेदी पर समर्पित कर देते हैं, इसलिए उस दिन सामान्य अकादमिक पढ़ाई करना, ग्रंथों को खोलना या संगीत का अभ्यास करना वर्जित माना गया है।
यह नियम उपकरणों के प्रति गहरी कृतज्ञता और सम्मान (Reverence) व्यक्त करने का माध्यम है।
अपवादस्वरूप: यदि किसी विद्यार्थी की कोई अति-महत्वपूर्ण परीक्षा हो, तो वह प्रातःकाल पूजा संपन्न करने के आधे घंटे पश्चात माता से मानसिक रूप से आज्ञा लेकर अपने उपकरणों का प्रयोग कर सकता है।
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