ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

तिथि शास्त्र प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

तिथि शास्त्र से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

क्षय तिथि क्या है — इसमें कौन से काम न करें?

क्षय तिथि=एक सूर्योदय में समाप्त(नष्ट)। सभी मांगलिक कार्य वर्जित(गृहप्रवेश/विवाह/खरीद)। दान/पूजा/जप मान्य। पंचांग/.com।

क्षय तिथिवर्जितपंचांग
पूरा उत्तर पढ़ें →

द्वितीया तिथि का अधिष्ठाता देवता कौन है?

द्वितीया तिथि का मुख्य अधिष्ठाता देवता यमराज हैं, जिनका इस तिथि पर विशेष आधिपत्य रहता है। पद्म पुराण के अनुसार यमुना ने यमराज को इसी तिथि पर भोजन कराया था। श्राद्ध के मूल अधिष्ठाता देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं, जो क्रमशः पिता, पितामह और प्रपितामह पीढ़ियों के प्रतिनिधि हैं। साथ ही विश्वेदेव पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष भी आहूत होते हैं।

यमराजद्वितीया अधिष्ठातावसु रुद्र आदित्य
पूरा उत्तर पढ़ें →

द्वितीया चन्द्रमा की कौन सी कला है?

द्वितीया चन्द्रमा की दूसरी कला है। वैदिक काल-गणना के अनुसार एक चान्द्र-मास में पन्द्रह तिथियाँ होती हैं, जिनमें द्वितीया चन्द्रमा की द्वितीय कला का प्रतिनिधित्व करती है। शुक्ल पक्ष में यह बढ़ते क्रम में दूसरी कला होती है, और कृष्ण पक्ष में घटते क्रम में। यह तिथि यमराज से सम्बन्धित मानी गई है।

द्वितीय कलाचन्द्र कलाद्वितीया तिथि
पूरा उत्तर पढ़ें →

द्वितीया तिथि क्या होती है?

द्वितीया तिथि चान्द्र-मास की दूसरी तिथि है, जो चन्द्रमा की द्वितीय कला का प्रतिनिधित्व करती है। प्रत्येक पक्ष यानी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में पन्द्रह तिथियाँ होती हैं, जिनमें द्वितीया दूसरी तिथि है। इस तिथि पर यमराज का विशेष आधिपत्य रहता है, और पितृ-कर्मों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है।

द्वितीया तिथिचन्द्र कलाचान्द्र मास
पूरा उत्तर पढ़ें →

अमावस्या को कौन से काम शुभ?

अमावस्या=पितर दिन। शुभ: तर्पण, श्राद्ध, दान, शनि/हनुमान पूजा, ध्यान। वर्जित: नया कार्य, गृहप्रवेश, विवाह, खरीद। पितर+साधना=शुभ, सांसारिक=अशुभ।

अमावस्याशुभपितर
पूरा उत्तर पढ़ें →

तिथि शास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तिथि शास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

तिथि शास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

तिथि शास्त्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।