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ज्योतिष ज्ञान प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

ज्योतिष ज्ञान से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

नक्षत्र और राशि में क्या अंतर है?

राशि=12 भाग(30°), नक्षत्र=27 भाग(13°20')। 1 राशि=2¼ नक्षत्र। राशि=सामान्य, नक्षत्र=सूक्ष्म। नक्षत्र=वैदिक ज्योतिष मूल। राशि=शहर, नक्षत्र=मोहल्ला।

नक्षत्रराशिअंतर
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विंशोत्तरी दशा पद्धति क्या है?

पराशर प्रणीत, सबसे प्रचलित। 9 ग्रह=120 वर्ष (सूर्य6+चंद्र10+मंगल7+राहु18+गुरु16+शनि19+बुध17+केतु7+शुक्र20)। जन्म नक्षत्र=पहली दशा। योग+दशा=फलित। सबसे महत्वपूर्ण भविष्यवाणी उपकरण।

विंशोत्तरीदशा120 वर्ष
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पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ क्यों?

पुष्य=सबसे शुभ नक्षत्र(गुरु स्वामी)। गुरु=सोना कारक→पुष्य+सोना=दोहरी शुभता। 'पुष्य'=पोषण/वृद्धि। गुरुपुष्यामृत(गुरुवार+पुष्य)=सर्वोत्तम। सर्वार्थ सिद्धि नक्षत्र।

पुष्य नक्षत्रसोनाशुभ
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योगिनी दशा क्या है?

8 योगिनी(मंगला→संकटा)=36 वर्ष चक्र। 1+2+3+4+5+6+7+8=36। विंशोत्तरी से सरल+तीव्र। अल्पकालिक भविष्य=अधिक सटीक। तांत्रिक ज्योतिष। विंशोत्तरी+योगिनी=सटीक।

योगिनी दशा36 वर्षभविष्य
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ग्रह गोचर का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

गोचर=ग्रहों की वर्तमान स्थिति। शनि(2.5yr), गुरु(1yr), राहु-केतु(1.5yr)=प्रमुख। भावों से गुजरता=उस विषय सक्रिय। कुंडली+दशा+गोचर तीनों=फल। अकेला गोचर=अधूरा।

गोचरTransitप्रभाव
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ज्योतिष में 'आश्रय योग' किसे कहते हैं?

जब कुंडली के सभी 7 ग्रह किसी एक खास स्वभाव (चर, स्थिर या द्विस्वभाव) वाली राशियों का ही 'आश्रय' (सहारा) ले लें, तो उसे आश्रय योग कहते हैं (जैसे नल योग)।

आश्रय योगरज्जुमूसल
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द्विस्वभाव राशियां (Dual Signs) क्या होती हैं?

मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियों को द्विस्वभाव राशियां कहते हैं। इनका स्वभाव समय और परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेने वाला (लचीला) होता है।

द्विस्वभाव राशियांमिथुनकन्या
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ज्योतिष ज्ञान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ज्योतिष ज्ञान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ज्योतिष ज्ञान को गहराई से समझने का तरीका

ज्योतिष ज्ञान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।