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नियम और वर्जनाएं प्रश्नोत्तर — 34 प्रश्न

नियम और वर्जनाएं से जुड़े 34 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 34 प्रश्न

एकादशी के दिन दातून करना और दिन में सोना क्यों वर्जित है?

पेड़ को नुकसान पहुंचाना मना है, इसलिए लकड़ी की दातून नहीं करनी चाहिए। दिन में सोने से आलस्य आता है और एकादशी के 'रात्रि जागरण' का पुण्य खत्म हो जाता है।

शारीरिक क्रियाएँदातून निषेधदिवा निद्रा
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एकादशी के दिन चावल (अन्न) खाना क्यों मना है?

शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन अनाज में पाप का वास होता है। इसलिए इस दिन चावल या कोई भी अन्न (अनाज), दाल, लहसुन, प्याज बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।

अन्न निषेधचावलपाप भक्षण
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एकादशी के दिन अनाज (गेहूं, चावल) खाना पाप क्यों है?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन दुनिया के सारे पाप अन्न (अनाज) में आकर छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन अनाज खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

अन्न निषेधपाप पुरुषभोजन निषेध
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एकादशी के दिन दातून करना और दिन में सोना क्यों मना है?

पेड़-पौधों को तोड़ना शास्त्रों में मना है, इसलिए दातून नहीं करनी चाहिए। दिन में सोने से आलस्य बढ़ता है और एकादशी के 'रात्रि जागरण' का पुण्य नष्ट हो जाता है।

दैहिक निषेधदातून निषेधदिवा निद्रा
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सूतक-पातक (जन्म-मृत्यु) में देवशयनी व्रत कैसे करें?

सूतक-पातक में भी उपवास जरूर रखना चाहिए, बस भगवान की मूर्ति को छूना या पूजा करना मना है। आप मन में ही भगवान का जाप कर सकते हैं।

सूतक-पातकमानसिक व्रतअशौच
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प्रतिनिधि व्रत (Proxy Fasting) किसे कहते हैं?

अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा बीमार या कमजोर है, तो शास्त्रों के अनुसार उसकी जगह उसके परिवार का कोई सदस्य (पति, पत्नी या बेटा) उसका व्रत रख सकता है। इसे 'प्रतिनिधि व्रत' कहते हैं।

प्रतिनिधि व्रतप्रॉक्सी फास्टविकल्प
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बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं व्रत कैसे करें?

बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को भूखे रहने की जरूरत नहीं है। वे अनाज छोड़कर सिर्फ पानी, दूध और फल (फलाहार) खाकर यह व्रत रख सकते हैं।

अशक्तों के नियमफलाहाररोगी का व्रत
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व्रत वाले दिन सोना और गुस्सा करना क्यों वर्जित है?

एकादशी ध्यान और जागरण का दिन है, इसलिए इस दिन सोना मना है। झूठ बोलना, किसी की बुराई करना और गुस्सा करने से व्रत का सारा पुण्य खत्म हो जाता है।

दिवा निद्रामानसिक शुद्धिक्रोध निषेध
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क्या एकादशी के दिन पूजा के लिए तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?

नहीं, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना बिल्कुल मना है। भगवान की पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

तुलसी निषेधपूजा नियमतुलसी दल
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एकादशी के दिन दातून करना (पेड़ से लकड़ी तोड़ना) क्यों मना है?

एकादशी के दिन पेड़-पौधों को तोड़ना शास्त्रों में मना है। इसलिए दांत साफ करने के लिए पेड़ से लकड़ी (दातून) नहीं तोड़नी चाहिए, सिर्फ पानी से कुल्ला करना चाहिए।

दातून निषेधशारीरिक शुद्धिआचरण नियम
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एकादशी के दिन अनाज (गेहूं, चावल) क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन सारे पाप अनाज (अन्न) में छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन अनाज या चावल खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

अन्न निषेधपाप पुरुषव्रत नियम
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क्या एकादशी पर तुलसी को जल देना और छूना मना है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी माता को छूना, उन्हें जल चढ़ाना या उनके पत्ते तोड़ना पूरी तरह मना है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लेने चाहिए।

तुलसी पूजनजल निषेधलोक परंपरा
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बीमार लोग और मासिक धर्म (Periods) में महिलाएं व्रत कैसे करें?

बीमार और बुजुर्ग लोग सिर्फ फलाहार या दूध पीकर व्रत कर सकते हैं। मासिक धर्म में महिलाएं व्रत रख सकती हैं, बस उन्हें भगवान की मूर्ति नहीं छूनी चाहिए और मन में जाप करना चाहिए।

रोगी का व्रतऋतुकालफलाहार
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एकादशी के दिन सोना और झाड़ू लगाना क्यों वर्जित है?

दिन में सोने से आलस्य बढ़ता है और व्रत का फल कम हो जाता है। झाड़ू लगाने से छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों (सूक्ष्म जीवों) की जान जाने का डर रहता है, जो एक पाप है।

दिवा निद्राझाड़ू निषेधरात्रि जागरण
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एकादशी के दिन दातून करना क्यों मना है?

एकादशी के दिन पेड़-पौधों से लकड़ी या पत्ते तोड़ना पाप माना जाता है, इसलिए दातून नहीं करनी चाहिए। मुंह साफ करने के लिए सिर्फ पानी से कुल्ला करें।

दातून निषेधवृक्ष आघातलोक परंपरा
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व्रत के दिन क्या-क्या काम नहीं करने चाहिए (निषेध)?

इस दिन प्याज, लहसुन, मांस, शराब और शहद बिल्कुल न खाएं। ब्रह्मचर्य का पालन करें। बाल-नाखून काटना, साबुन लगाना, झूठ बोलना और किसी की बुराई (चुगली) करना मना है।

आचरण निषेधतामसिक आहारव्रत नियम
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एकादशी के दिन अन्न और चावल खाना क्यों मना है?

पुराणों के अनुसार एकादशी के दिन सारे पाप अनाज (विशेषकर चावल) में आकर छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन चावल या अनाज खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

चावल निषेधअन्न त्यागपाप भक्षण
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बीमार या बुजुर्ग लोग एकादशी का व्रत कैसे करें?

बीमार और बुजुर्ग लोग सिर्फ फलाहार करके या शाम को एक समय भोजन (नक्त) करके व्रत कर सकते हैं। बहुत ज्यादा बीमार लोगों के लिए घर का कोई दूसरा सदस्य 'प्रतिनिधि' बनकर उनका व्रत रख सकता है।

रोगी का व्रतप्रतिनिधि व्रतफलाहार
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एकादशी पर चावल खाना क्यों मना है?

पौराणिक कथा के अलावा वैज्ञानिक कारण यह है कि चावल बहुत ज्यादा पानी सोखता है। एकादशी पर चावल खाने से शरीर का जलीय तत्व बिगड़ जाता है, जिससे मन अशांत और चंचल हो जाता है।

चावल निषेधवैज्ञानिक कारणमानसिक शांति
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एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए (निषेध)?

इस दिन लकड़ी की दातून नहीं करनी चाहिए। कांसे के बर्तन का इस्तेमाल, गुस्सा करना, झूठ बोलना, चुगली करना, दिन में सोना और शारीरिक संबंध बनाना पूरी तरह मना है।

व्रत के नियमनिषेधदातून निषेध
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क्या घर में जन्म या मृत्यु (सूतक-पातक) होने पर भी एकादशी का व्रत रखना चाहिए?

हाँ, सूतक-पातक (जन्म या मृत्यु) में भी व्रत जरूर रखना चाहिए। बस भगवान की मूर्ति को हाथ नहीं लगाना चाहिए, आप मन ही मन जाप कर सकते हैं।

सूतक-पातकअशौचव्रत नियम
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एकादशी के व्रत में चावल (अक्षत) खाना सबसे बड़ा पाप क्यों माना जाता है?

महर्षि मेधा के शरीर के अंश से चावल और जौ पैदा हुए थे, इसलिए चावल को 'जीव' माना जाता है। साथ ही, एकादशी पर पाप पुरुष अनाज में रहता है, इसलिए चावल खाना पाप है।

चावल निषेधमहर्षि मेधाअन्न निषेध
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रात या शाम के समय श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए (राक्षसी श्राद्ध)?

शाम या रात के समय श्राद्ध करना शास्त्रों में मना है। इसे 'राक्षसी श्राद्ध' कहा जाता है और रात में किया गया श्राद्ध पूर्वजों तक नहीं पहुँच पाता है।

राक्षसी श्राद्धसमय निषेधसंध्या काल
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श्राद्ध करने वाले को किन नियमों का पालन करना चाहिए (बाल-दाढ़ी, तेल मालिश निषेध)?

श्राद्ध कर्ता को 16 दिनों तक बाल-दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए, और तेल मालिश नहीं करनी चाहिए। झूठ बोलना, गुस्सा करना, मांसाहार और ब्रह्मचर्य तोड़ना पूरी तरह मना है।

शारीरिक निषेधव्रत नियमब्रह्मचर्य
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कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन क्यों कराते हैं?

कुत्ता भगवान कालभैरव का वाहन होता है। इसलिए भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को दूध, दही या मीठी रोटी खिलाना बहुत शुभ माना जाता है।

काले कुत्ते की सेवाभैरव का वाहनव्रत नियम
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कालाष्टमी अगर शनिवार को पड़े तो क्या चीजें नहीं खरीदनी चाहिए?

अगर कालाष्टमी शनिवार को हो, तो उस दिन बाजार से चमड़े का सामान (जूते, बेल्ट) और अपने खाने-पीने के इस्तेमाल के लिए 'सरसों का तेल' बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए।

शनिवार व्रतचमड़ासरसों का तेल
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क्या दुर्गाष्टमी के व्रत में दिन में सोना मना है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार व्रत वाले दिन दिन में सोना पूरी तरह मना है क्योंकि इससे तामसी गुण बढ़ता है। रात में भी विलासिता छोड़कर ज़मीन पर या चटाई पर सोना चाहिए।

दिन में सोनाशयन नियमव्रत के नियम
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सत्यनारायण पूजा में जन्म-मृत्यु (सूतक-पातक) के क्या नियम हैं?

घर-परिवार में किसी बच्चे के जन्म (सूतक) या किसी की मृत्यु (पातक) होने पर यह पूजा नहीं करनी चाहिए। पूरे दिन बीतने और घर की शुद्धि होने के बाद ही पूजा करनी चाहिए।

सूतकपातकअशौच
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क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में शनिवार का व्रत कर सकती हैं?

हाँ, वे व्रत (उपवास) रख सकती हैं और मन में मंत्र पढ़ सकती हैं। लेकिन पूजा करना, मूर्ति छूना या मंदिर जाना सख्त मना है। इन दिनों के व्रत को कुल व्रत की गिनती में नहीं जोड़ा जाता।

मासिक धर्मरजस्वला नियमधर्मसिंधु
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शनिवार को लोहा और तेल खरीदकर घर क्यों नहीं लाना चाहिए?

'मुहूर्त चिंतामणि' के अनुसार लोहा शनि की धातु है। शनिवार को इसे या तेल को खरीदकर घर लाने से घर में गरीबी और क्लेश (लड़ाई-झगड़े) का प्रवेश होता है। इन्हें पहले से खरीदकर रखें और शनिवार को केवल दान करें।

लोहा खरीदनातेल खरीदनामुहूर्त चिंतामणि
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शनि देव की आँखों में देखकर दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए? (दृष्टि दोष)

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शनि की दृष्टि में विनाशकारी शक्ति होती है (जिससे गणेश जी का सिर कटा था)। इसलिए उनकी आँखों में आँखें डालकर नहीं, बल्कि हमेशा उनके चरणों के दर्शन करने चाहिए।

दृष्टि दोषदर्शन नियमब्रह्मवैवर्त पुराण
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नियम और वर्जनाएं — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नियम और वर्जनाएं श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नियम और वर्जनाएं को गहराई से समझने का तरीका

नियम और वर्जनाएं प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

34 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।