विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म के शास्त्रों में मानवीय अक्षमताओं का विशेष ध्यान रखा गया है। 'प्रतिनिधि व्रत' का अर्थ है किसी और की जगह व्रत रखना। यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक बीमार (रुग्ण) है या शारीरिक रूप से व्रत रखने में बिल्कुल असमर्थ है, तो शास्त्रों की आज्ञा के अनुसार उसके निमित्त (उसकी ओर से) उसका पुत्र, पति या पत्नी एकादशी का व्रत रख सकते हैं, इसे ही प्रतिनिधि व्रत (Proxy Fasting) कहा जाता है।
