विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन कुछ दैहिक (शारीरिक) कार्य पूर्णतः वर्जित हैं। इस दिन मुख शुद्धि के लिए दातुन करना (पेड़ से टहनी तोड़ना) वर्जित है क्योंकि इसे पेड़ को कष्ट पहुंचाना माना जाता है। इसके अलावा बाल या नाखून काटना और दिन में सोना (दिवा-निद्रा) भी सख्त मना है। एकादशी की रात में 'जागरण' करने (हरि-कीर्तन करने) वाले को दस हजार वर्षों की तपस्या का फल मिलता है।





