विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार एकादशी पर चावल खाना सबसे बड़ा निषेध है। इसकी पौराणिक कथा यह है कि जब महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्यागा था, तब उनके शरीर का अंश पृथ्वी में समा गया और उसी से 'जौ' और 'चावल' उत्पन्न हुए। इसी कारण चावल को 'जीव' के समान माना गया है। इसके अलावा, एकादशी के दिन पाप पुरुष का वास भी अन्न में होता है, इसलिए चावल खाना वर्जित है।
