विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों के अनुसार, परिवार में जन्म (सूतक) या मृत्यु (पातक) के कारण होने वाले 'अशौच' (Impurity) की स्थिति में श्री सत्यनारायण पूजा का आयोजन या अनुष्ठान सर्वथा वर्जित है। जन्म या मृत्यु के पश्चात शास्त्रों में निर्धारित शुद्धि के दिन (सामान्यतः 10 से 13 दिन) पूरे होने और घर की शुद्धि होने के बाद ही यह पूजा संपन्न की जा सकती है।





