विस्तृत उत्तर
एकादशी के दिन कई शारीरिक और मानसिक आचरणों का कड़ा निषेध है। मुख की शुद्धि के लिए लकड़ी की 'दातून' करना वर्जित है क्योंकि एकादशी पर वृक्ष को चोट पहुँचाना हिंसा माना गया है (मुंह सिर्फ पानी से साफ करें)। कांसे के बर्तन में खाना-पीना मना है। दशमी से द्वादशी तक ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करें। मानसिक रूप से क्रोध करना, झूठ बोलना, दूसरों की निंदा (चुगली) करना और जुआ खेलना पूरी तरह वर्जित है। व्रत वाले दिन दिन में सोना (Day sleeping) भी व्रत को खंडित कर देता है।


