ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

निषेध से जुड़े सभी प्रश्न(37)

निषेध पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 37 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर नारियल पानी चढ़ाने का क्या महत्व होता है?

शिवलिंग पर नारियल पानी चढ़ाना वर्जित है। कारण: नारियल 'श्रीफल' = लक्ष्मी का स्वरूप (विष्णु-संबंधित)। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण नहीं होता — नारियल पानी व्यर्थ होगा। साबुत नारियल शिव के समक्ष रख सकते हैं, पर नारियल पानी से अभिषेक कभी न करें। शिवलिंग पर चढ़ा नारियल प्रसाद में न लें।

#नारियल पानी#शिवलिंग#निषेध
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, इसका कारण बताएं?

शिवलिंग पर हल्दी वर्जित। कारण: हल्दी = स्त्री सौभाग्य/सौंदर्य प्रतीक, शिव = वैरागी। हल्दी = विष्णु/बृहस्पति से संबंधित (पीतांबर)। रसोई सामग्री, शिव श्मशानवासी। शिवलिंग पर चंदन, भस्म या केसर लगाएं। पार्वती प्रतिमा पर हल्दी स्वीकार्य।

#हल्दी#शिवलिंग#निषेध
शिव पूजा नियम

शिवलिंग से बहकर आया जल पीना चाहिए या नहीं?

शिवलिंग का अभिषेक जल (निर्माल्य) ग्रहण करना शिव पुराण/लिंग पुराण में वर्जित है। कारण: शिव-शक्ति की तीव्र ऊर्जा, सोमसूत्र की पवित्रता। अन्य देवताओं का चढ़ावा ग्रहण होता है, शिवलिंग का नहीं — यह विशिष्ट नियम है। शिव मूर्ति का चरणामृत स्वीकार्य (भिन्न नियम)। अभिषेक जल पौधों में डालें।

#चरणामृत#शिवलिंग जल#निर्माल्य
श्राद्ध विधि

पितृपक्ष में विवाह क्यों नहीं करते?

कारण: (1) पितरों को समर्पित काल — उत्सव अनुचित। (2) श्रद्धा काल ≠ उत्सव। (3) ज्योतिष — सूर्य कन्या, यम दिशा प्रबल। (4) पितृ दोष लगने का भय। (5) शुभ मुहूर्त अभाव।

#पितृपक्ष विवाह#निषेध#कारण
लोक

मघा त्रयोदशी में निषेध क्यों नहीं लगता?

मघा त्रयोदशी विशेष पितृ योग है।

#मघा त्रयोदशी#गजाच्छाया#निषेध
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध सुबह कर सकते हैं क्या?

नहीं, अपराह्न काल श्रेष्ठ है।

#सुबह श्राद्ध#त्रयोदशी#निषेध
लोक

एकादशी श्राद्ध शाम को कर सकते हैं क्या?

नहीं, शाम को श्राद्ध निषिद्ध है।

#शाम श्राद्ध#सायाह्न#निषेध
लोक

दशमी श्राद्ध में कौन सा अन्न वर्जित है?

चना, मसूर, उड़द, कुलथी आदि।

#वर्जित अन्न#दशमी श्राद्ध#निषेध
लोक

नवमी श्राद्ध में क्षौर कर्म क्यों वर्जित है?

पितृ पक्ष संयम का काल है।

#क्षौर कर्म#पितृ पक्ष#निषेध
नियम और निषेध

एकादशी को तुलसी पत्र क्यों नहीं तोड़ते?

एकादशी, द्वादशी, संक्रांति, रविवार और ग्रहण पर तुलसी पत्र तोड़ना निषिद्ध। समाधान: एक दिन पहले (दशमी) को तोड़कर रख लें। तुलसी पत्र 11 दिन तक बासी नहीं — गंगाजल से धोकर पुनः उपयोग कर सकते हैं।

#एकादशी तुलसी पत्र#निषेध#दशमी को तोड़ें
नियम और निषेध

वाहन पूजन के बाद क्या नहीं करना चाहिए?

वाहन पूजन के बाद निषेध: (1) वाहन में मद्यपान/मांसाहार — सुरक्षा कवच भंग, (2) क्रोध/अपशब्द से चालन — दुर्घटना का कारण। नियम: मंदिर से पहली यात्रा, स्वच्छता, विश्वकर्मा पूजा।

#वाहन पूजन नियम#निषेध#सुरक्षा कवच
पारद शिवलिंग की सावधानियाँ

पारद शिवलिंग को किस धातु पर नहीं रखना चाहिए?

पारद शिवलिंग को लोहे या स्टील की वेदी पर नहीं रखना चाहिए — ये तामसिक माने जाते हैं। केवल तांबा, पीतल या चांदी की वेदी का प्रयोग करें।

#लोहा स्टील वर्जित#तामसिक धातु#वेदी
सावधानियाँ और नियम

बटुक भैरव साधना में कौन सी माला वर्जित है?

बटुक भैरव साधना में प्लास्टिक या अन्य अपवित्र माला वर्जित है — केवल रुद्राक्ष या हकीक की माला ही प्रयोग करें।

#वर्जित माला#प्लास्टिक माला#अपवित्र माला
सावधानियाँ और नियम

बटुक भैरव साधना में कौन से कर्म वर्जित हैं?

वर्जित कर्म: मारण-मोहन-उच्चाटन जैसे तामसिक प्रयोग, क्रोध, मांस-मदिरा, सहवास, गुरु आज्ञा का उल्लंघन और अप्रामाणिक मंत्र जप।

#वर्जित कर्म#मारण मोहन#तामसिक प्रयोग
सावधानियाँ

कालसर्प दोष में तामसिक प्रयोग क्यों नहीं करने चाहिए?

भगवद्गीता के अनुसार शत्रु-नाश या स्वार्थ के लिए तामसिक प्रयोग करने वाले 'आसुरी-निष्ठा' वाले कहलाते हैं और उनका पतन निश्चित है — ये प्रयोग आम साधकों के लिए सर्वथा निषिद्ध हैं।

#तामसिक प्रयोग#आसुरी निष्ठा#भगवद्गीता
साधना की सावधानियाँ

क्या नीलकंठ स्तोत्र का प्रयोग काला जादू के लिए कर सकते हैं?

नहीं — नीलकंठ स्तोत्र षट्कर्मों को नष्ट करने के लिए है, उनके तामसिक प्रयोग के लिए नहीं। इसका उपयोग केवल कल्याणकारी और रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए ही करना चाहिए।

#काला जादू#तामसिक प्रयोग#निषेध
सावधानियाँ

अर्धनारीश्वर अनुष्ठान में कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?

सावधानियां: सात्त्विक मन रखें; धूम्रपान, मद्यपान, मांसाहार त्यागें; ब्रह्मचर्य पालन करें; तांत्रिक साधनाओं के लिए योग्य गुरु से दीक्षा लें।

#सावधानियाँ#सात्त्विक भाव#निषेध
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१४ मुखी रुद्राक्ष के लिए किन विशिष्ट खाद्य पदार्थों का निषेध है?

देवी भागवत के अनुसार १४ मुखी रुद्राक्ष धारक को मांस, शराब, प्याज और लहसुन का त्याग करना चाहिए।

#14 मुखी#निषेध#देवी भागवत
नियम निषेध

बेलपत्र चढ़ाते समय किन बातों की सावधानी (निषेध) रखनी चाहिए?

बेलपत्र कटा-फटा या उसमें कोई छेद नहीं होना चाहिए। चढ़ाते समय उसकी डंडी शिव जी की तरफ नहीं होनी चाहिए और चढ़ाए हुए पत्तों का अपमान नहीं करना चाहिए।

#निषेध#सावधानी#खंडित पत्र
व्रत नियम

इस दिन कौन से काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए (निषेध)?

इस दिन सरसों के तेल की मालिश करना, दिन में सोना, मांस-मदिरा खाना, झूठ बोलना और बेवजह गुस्सा करना शास्त्रों में महापाप माना गया है।

#निषेध#तेल मालिश#तामसिक
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए (निषेध)?

इस दिन लकड़ी की दातून नहीं करनी चाहिए। कांसे के बर्तन का इस्तेमाल, गुस्सा करना, झूठ बोलना, चुगली करना, दिन में सोना और शारीरिक संबंध बनाना पूरी तरह मना है।

#व्रत के नियम#निषेध#दातून निषेध
आहार और नियम

श्राद्ध के भोजन में क्या बनाना चाहिए और क्या नहीं (मसूर, लहसुन-प्याज निषेध)?

श्राद्ध के खाने में गाय का दूध, घी, चावल, मूंग और सेंधा नमक श्रेष्ठ है। प्याज, लहसुन, मांस, अंडा, मसूर की दाल, चना, राजमा, बैंगन, मूली, गाजर और हींग का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

#वर्जित अन्न#सात्विक आहार#निषेध
आहार और नियम

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं (निषेध)?

दिन भर निराहार या फलाहार (कुट्टू, सिंघाड़ा, सेंधा नमक) पर रहें। शाम को एक बार सात्विक भोजन कर सकते हैं। मांस, शराब, लहसुन, प्याज, बैंगन और मसूर की दाल खाना पूरी तरह मना है।

#व्रत का खाना#निषेध#सात्विक आहार
आहार और नियम

सत्यनारायण व्रत में उपवास के क्या नियम हैं और क्या नहीं खाना चाहिए?

व्रत के दिन मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और मसूर की दाल बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। आप दिन भर फलाहार कर सकते हैं या पूजा के बाद बिना नमक का सादा भोजन (हविष्यान्न) ले सकते हैं।

#उपवास नियम#निषेध#हविष्यान्न
आहार और नियम

शनिवार काली व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

इस व्रत में मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और 'मसूर की दाल' बिल्कुल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन्हें तामसिक माना जाता है।

#निषेध#मांस मदिरा#मसूर दाल
काली के स्वरूप

घर में श्मशान काली की पूजा क्यों नहीं करते?

श्मशान काली बहुत उग्र होती हैं (बायां पैर आगे होता है)। संतों के अनुसार इनकी तीव्र ऊर्जा को आम इंसान नहीं संभाल सकता, जिससे घर में भयंकर क्लेश और वास्तु दोष हो सकता है।

#श्मशान काली#निषेध#वास्तु दोष
काशी के शिवलिंग

घंटाकर्णेश्वर मंदिर में क्या-क्या वर्जित है?

प्रमुख निषेध — (१) विष्णु या किसी देवता की निंदा सख्त मना, (२) अपशब्द-परनिंदा वर्जित, (३) अधिक बोलना मना — मौन और श्रवण प्रमुख, (४) बिना स्नान/मार्जन दर्शन वर्जित।

#घंटाकर्णेश्वर#निषेध#मंदिर नियम
दैनिक आचार

गुरुवार को बाल धोना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: गुरुवार बाल धोना अशुभ (बृहस्पति कमजोर)। शास्त्रीय आधार नहीं — पूर्णतः लोक/ज्योतिष। स्वच्छता > परंपरा। आस्था अनुसार; आवश्यकता हो तो धो सकते हैं।

#गुरुवार#बाल धोना#बृहस्पति
दैनिक आचार

शनिवार को क्या चीजें नहीं खरीदनी चाहिए

लोक मान्यता: शनिवार को लोहा/स्टील, काले कपड़े, तेल, नमक, चाकू, झाड़ू न खरीदें। दान करें: सरसों तेल, काले कपड़े। पूर्णतः ज्योतिषीय/लोक परंपरा — वैदिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख नहीं।

#शनिवार#शनि#खरीदारी
दैनिक आचार

मंगलवार शनिवार को बाल कटवाना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: मंगलवार/शनिवार/गुरुवार बाल कटवाना अशुभ। शुभ: सोमवार/बुधवार/शुक्रवार। किसी शास्त्रीय ग्रंथ में उल्लेख नहीं — पूर्णतः लोक परंपरा। आवश्यकता अनुसार कटवा सकते हैं।

#बाल कटाना#मंगलवार#शनिवार
पूजा विधि

तुलसी के पत्ते रविवार और एकादशी को क्यों नहीं तोड़ते?

रविवार: सूर्य देव का दिन, तुलसी विश्राम, जल-दीपक-पत्ते तीनों वर्जित। एकादशी: विष्णु की पवित्र तिथि, तुलसी को कष्ट न दें। द्वादशी पर सर्वाधिक कठोर निषेध (ब्रह्म हत्या सम)। उपाय: दशमी/शनिवार को पहले तोड़ रखें — तुलसी बासी नहीं होती।

#तुलसी रविवार#तुलसी एकादशी#निषेध
मंदिर

मंदिर में पूजा के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

मंदिर में वर्जित: जोरदार बात, मोबाइल उपयोग, दौड़ना, देवता की ओर पीठ। बाएँ हाथ से अर्पण, जूठी वस्तु, टूटे पुष्प। देवता-निषेध वस्तु (तुलसी शिव को नहीं)। सूतक/पातक में प्रवेश नहीं (मनुस्मृति)। मंदिर में सौदेबाज़ी, भोजन, तंबाकू वर्जित। विष्णु स्मृति: अशुद्ध की पूजा निष्फल।

#मंदिर#वर्जित#निषेध
शिव पूजा

शिव पूजा के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

शिव पूजा में वर्जित: तुलसी (निषिद्ध), केवड़ा (शापित), टूटे पुष्प, भैंस का दूध, बासी भोग। जूते पहनकर न बैठें। पूजा में बात/हँसी नहीं। पूर्ण परिक्रमा नहीं — केवल अर्धपरिक्रमा। सूतक/ग्रहण में पूजा नहीं। क्रोध-लोभ की अवस्था में पूजा व्यर्थ।

#शिव पूजा#वर्जित#निषेध
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, शिव पुराण में क्या प्रमाण है?

शिव पुराण/पद्म पुराण: तुलसी पूर्वजन्म में वृंदा थी — जालंधर (राक्षस) की पत्नी। शिव ने जालंधर वध किया, वृंदा ने शिव को दोषी ठहराया। वृंदा के आत्मदाह से तुलसी उत्पन्न। तुलसी विष्णु-प्रिया, शिव पूजा में वर्जित। भिन्न मत: ब्रह्म पुराण और निर्णयसिंधु में तुलसी-शिव निषेध स्पष्ट नहीं — विवादित विषय।

#तुलसी#शिवलिंग#वृंदा
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर कौन-कौन से फूल नहीं चढ़ाने चाहिए और क्यों?

शिवलिंग पर वर्जित फूल: केतकी (ब्रह्मा जी के झूठ में साक्षी — शिव का श्राप)। लाल रंग के फूल (गुड़हल आदि — शिव को श्वेत प्रिय)। कनेर। कमल (विष्णु-लक्ष्मी से संबद्ध)। शिव-प्रिय फूल: धतूरा, आंकड़े, श्वेत फूल, चमेली, बेला।

#फूल#शिवलिंग#निषेध
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर सिंदूर क्यों नहीं चढ़ाया जाता, इसका पौराणिक कारण क्या है?

शिवलिंग पर सिंदूर वर्जित है क्योंकि: शिव वैरागी-संन्यासी हैं, भस्म रमाते हैं — श्रृंगार उनके स्वरूप से विपरीत। सिंदूर सुहाग का प्रतीक, शिव संहारक — विरोधाभास। सिंदूर स्त्री तत्त्व से संबंधित, शिवलिंग पर नहीं, पार्वती प्रतिमा पर अर्पित करें। शिवलिंग पर चंदन या भस्म लगाएं।

#सिंदूर#शिवलिंग#निषेध
शिव पूजा नियम

शिव पूजा में शंख बजाना वर्जित क्यों माना जाता है?

शिव पुराण: शंखचूड़ दैत्य का शिव ने वध किया → उसकी अस्थियों से शंख उत्पन्न → दैत्य अवशेष से शिव पूजा अनुचित। शंख से जल और शंख बजाना दोनों वर्जित। तांबे/कांसे से जल चढ़ाएं। शंख = विष्णु प्रतीक, विष्णु पूजा में शुभ।

#शंख#निषेध#शंखचूड़
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।