विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर सिंदूर, कुमकुम या रोली चढ़ाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। इसके पीछे प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक कारण:
कारण 1 — शिव का वैरागी एवं संन्यासी स्वरूप
भगवान शिव का स्वरूप विरक्त, संन्यासी और तपस्वी है। वे भस्म रमाने वाले, जटाधारी और श्मशानवासी हैं। सिंदूर श्रृंगार और सौंदर्य का प्रतीक है जो शिव के वैराग्य स्वरूप से मेल नहीं खाता। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर भस्म या चंदन का लेप ही उचित है, श्रृंगार सामग्री नहीं।
कारण 2 — शिव का संहारक रूप
सिंदूर सुहाग का प्रतीक है — विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं। भगवान शिव त्रिदेवों में संहारक की भूमिका निभाते हैं। संहारक स्वरूप पर सुहाग सामग्री अर्पित करना विरोधाभासी माना गया है।
कारण 3 — स्त्री तत्त्व से संबंध
सिंदूर, कुमकुम, हल्दी आदि का संबंध स्त्री तत्त्व और सौभाग्य से है। शिवलिंग पुरुष तत्त्व (शिव) और शक्ति तत्त्व (पार्वती) दोनों का सम्मिलित प्रतीक है, किन्तु इस पर श्रृंगार सामग्री चढ़ाने का विधान नहीं है। माता पार्वती की प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित किया जाता है, शिवलिंग पर नहीं।
कारण 4 — एक पौराणिक कथा
एक मान्यता के अनुसार एक बार माता पार्वती ने शिवलिंग पर कुमकुम अर्पित किया तो उन्हें रक्त का भ्रम हो गया। तभी से शिवलिंग पर लाल सिंदूर/कुमकुम वर्जित हो गया। (यह कथा कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में प्रचलित है, सभी पुराणों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।)
शिवलिंग पर क्या लगाएं
- ▸श्वेत चंदन का लेप — शिव को अत्यंत प्रिय
- ▸भस्म (विभूति) — शिव के वैराग्य का प्रतीक
- ▸इत्र — श्रृंगार सामग्री में केवल इत्र शिवलिंग पर स्वीकार्य





