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शिव पूजा नियम📜 शिव पुराण, लिंग पुराण, धर्मशास्त्र3 मिनट पठन

शिवलिंग से बहकर आया जल पीना चाहिए या नहीं?

संक्षिप्त उत्तर

शिवलिंग का अभिषेक जल (निर्माल्य) ग्रहण करना शिव पुराण/लिंग पुराण में वर्जित है। कारण: शिव-शक्ति की तीव्र ऊर्जा, सोमसूत्र की पवित्रता। अन्य देवताओं का चढ़ावा ग्रहण होता है, शिवलिंग का नहीं — यह विशिष्ट नियम है। शिव मूर्ति का चरणामृत स्वीकार्य (भिन्न नियम)। अभिषेक जल पौधों में डालें।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग से बहकर आया जल (अभिषेक जल/निर्माल्य जल) पीने को लेकर शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश हैं:

मूल नियम — शिवलिंग का निर्माल्य ग्रहण वर्जित

शिव पुराण और लिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ाई गई किसी भी सामग्री (जल, दूध, पंचामृत, फल, फूल आदि) को प्रसाद या चरणामृत के रूप में ग्रहण नहीं करना चाहिए। यह अन्य देवी-देवताओं की पूजा से भिन्न नियम है — अन्य देवताओं का चढ़ावा प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है, किन्तु शिवलिंग का नहीं।

कारण

1शिवलिंग की अत्यधिक ऊर्जा

शिवलिंग से प्रवाहित जल में शिव और शक्ति दोनों की ऊर्जा समाहित होती है। यह ऊर्जा अत्यंत तीव्र और उग्र है — सामान्य व्यक्ति के शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

2सोमसूत्र की पवित्रता

जलाधारी (सोमसूत्र) से बहने वाला जल 'निर्माल्य' कहलाता है। इसे लांघना भी वर्जित है, तो पीना तो और भी निषिद्ध।

3विशिष्टता

शिव पुराण में शिव के निर्माल्य को विशेष श्रेणी में रखा गया है — यह अत्यंत पवित्र होने के कारण ही ग्रहण नहीं किया जाता, न कि अशुद्धता के कारण।

अपवाद और भिन्न मत

4शिव मूर्ति का चरणामृत

कुछ परंपराओं में शिव की मूर्ति (प्रतिमा) के चरणों को धोकर प्राप्त चरणामृत ग्रहण किया जाता है। किन्तु यह नियम शिवलिंग पर लागू नहीं है — शिवलिंग और शिव मूर्ति के नियम भिन्न हैं।

5महाप्रसाद (कुछ मंदिर)

कुछ प्रसिद्ध शिव मंदिरों (जैसे सोमनाथ, काशी विश्वनाथ) में अभिषेक जल को विशेष प्रक्रिया के बाद भक्तों को दिया जाता है। यह मंदिर की विशेष परंपरा है, सामान्य नियम नहीं।

6तांत्रिक साधना

कुछ विशेष तांत्रिक साधनाओं में शिवलिंग का अभिषेक जल ग्रहण करने का विधान मिलता है, किन्तु यह गुरु-मार्गदर्शन में ही किया जाता है।

शिवलिंग का जल कहां डालें

शिवलिंग से बहकर आया जल पौधों में डाल सकते हैं — विशेषतः बिल्व वृक्ष या तुलसी के पौधे में। इसे नाली में या अपवित्र स्थान पर न बहाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, लिंग पुराण, धर्मशास्त्र
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