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सोमसूत्र — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

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शिव पूजा नियम

शिवलिंग से बहकर आया जल पीना चाहिए या नहीं?

शिवलिंग का अभिषेक जल (निर्माल्य) ग्रहण करना शिव पुराण/लिंग पुराण में वर्जित है। कारण: शिव-शक्ति की तीव्र ऊर्जा, सोमसूत्र की पवित्रता। अन्य देवताओं का चढ़ावा ग्रहण होता है, शिवलिंग का नहीं — यह विशिष्ट नियम है। शिव मूर्ति का चरणामृत स्वीकार्य (भिन्न नियम)। अभिषेक जल पौधों में डालें।

चरणामृतशिवलिंग जलनिर्माल्य
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की जलाधारी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

जलाधारी का मुख सदैव उत्तर दिशा में (शिव पुराण, स्कन्द पुराण, वास्तु शास्त्र — तीनों एकमत)। वैकल्पिक: पूर्व दिशा। दक्षिण और पश्चिम सर्वथा वर्जित। उत्तर = कुबेर की दिशा, समृद्धि प्रवाह, सकारात्मक ऊर्जा। घर और मंदिर में नियम समान। जलाधारी कभी न लांघें।

जलाधारीसोमसूत्रदिशा
मंदिर ज्ञान

शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं करते — जलाधारी तक क्यों?

सोमसूत्र (जलाधारी जल मार्ग) = लांघना अशुभ (Zee News)। अभिषेक जल = शिव ऊर्जा। बाएं→जलाधारी→वापस→दाएं→जलाधारी→वापस = आधी (चंद्रकला)। स्वयंभू/घर = पूरी मान्य।

शिवलिंगपरिक्रमापूरी नहीं
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की परिक्रमा अर्धचंद्राकार क्यों की जाती है, पूरी गोल क्यों नहीं?

शिवलिंग की अर्धचंद्राकार परिक्रमा इसलिए होती है क्योंकि सोमसूत्र (जलधारी) को लांघना शास्त्रों में वर्जित है। शिवलिंग से प्रवाहित जल में शिव-शक्ति की ऊर्जा होती है। बाईं ओर से आरंभ कर जलधारी तक जाएं, फिर विपरीत दिशा में लौटें — यह चंद्राकार प्रदक्षिणा कहलाती है। शिव मूर्ति की पूरी परिक्रमा हो सकती है, शिवलिंग की नहीं।

परिक्रमाअर्धचंद्राकारशिवलिंग
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की जलाधारी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

जलाधारी का मुख सदैव उत्तर दिशा में (शिव पुराण, स्कन्द पुराण, वास्तु शास्त्र — तीनों एकमत)। वैकल्पिक: पूर्व दिशा। दक्षिण और पश्चिम सर्वथा वर्जित। उत्तर = कुबेर की दिशा, समृद्धि प्रवाह, सकारात्मक ऊर्जा। घर और मंदिर में नियम समान। जलाधारी कभी न लांघें।

जलाधारीसोमसूत्रदिशा

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।