विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में कुछ विशेष फूल वर्जित माने गए हैं। शास्त्रों में इनके निषेध के स्पष्ट कारण दिए गए हैं:
1केतकी (केवड़ा) का फूल — पूर्णतः वर्जित
शिव पुराण की प्रसिद्ध कथा के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ। तब अनंत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। विष्णु जी नीचे की ओर और ब्रह्मा जी ऊपर की ओर उसका अंत खोजने गए। ब्रह्मा जी को मार्ग में केतकी का फूल मिला। ब्रह्मा जी ने झूठ बोला कि उन्होंने शिवलिंग का ऊपरी सिरा देख लिया है और केतकी को झूठी गवाही देने के लिए कहा। केतकी ने साक्षी बनकर ब्रह्मा जी का झूठ समर्थित किया। भगवान शिव ने क्रुद्ध होकर केतकी को श्राप दिया कि यह फूल कभी भी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं होगा।
2कमल का फूल — विवादित/प्रतिबंधित
कमल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से विशेष रूप से संबद्ध है। कुछ शास्त्रीय परंपराओं में कमल को शिवलिंग पर अर्पित करने से बचने का विधान है, यद्यपि यह सर्वमान्य निषेध नहीं है। लाल कमल का निषेध अधिक प्रचलित है।
3लाल रंग के फूल — सामान्यतः वर्जित
भगवान शिव को श्वेत रंग प्रिय है। लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल, लाल गुलाब आदि) सामान्यतः शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते। लाल रंग का संबंध देवी पूजा और हनुमान जी से माना गया है।
4कनेर के फूल — निषिद्ध
कनेर के फूल को शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। यह विष्णु-प्रिय फूल माना गया है।
शिवलिंग पर कौन से फूल चढ़ाएं
- ▸धतूरा — शिव को सर्वाधिक प्रिय (शिव पुराण)
- ▸आंकड़े (मदार/अर्क) के फूल — शिव पूजा में विशेष महत्व
- ▸श्वेत फूल — सभी प्रकार के सफेद फूल शिव को प्रिय
- ▸चमेली — सुगंधित और शिव-प्रिय
- ▸बेला — शुभ माना गया है
- ▸नीलकमल — कुछ परंपराओं में विशेष फलदायी
ध्यान दें: विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं और सम्प्रदायों में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं। केतकी का निषेध सर्वमान्य है, अन्य फूलों के संबंध में स्थानीय पुरोहित से परामर्श उचित रहता है।





