विस्तृत उत्तर
व्रत-भंग के दोषों से बचने के लिए शास्त्रकारों ने कुछ कड़े निषेध बताए हैं। सामान्य दिनों में की जाने वाली तेल-मालिश (विशेषकर सरसों के तेल से, जो शनि का कारक है) इस दिन पूरी तरह वर्जित है क्योंकि शनि और सूर्य में शत्रुभाव है। इसके अलावा मदिरा, मांसाहार, तामसिक भोजन, झूठ बोलना, अकारण क्रोध करना और किसी का अपमान करना महापाप माना गया है। व्रत के दिन में सोना (दिवास्वप्न) और सूर्योदय के बाद देर तक बिस्तर पर रहना भी इस दिन अवांछित है।





