विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों के अनुसार रथ सप्तमी का व्रत 'सार्वत्रिक' है, जिसका अर्थ है कि इसे कोई भी— गृहस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी, स्त्री, पुरुष, वृद्ध और रोगी— कर सकता है। स्त्रियों के लिए यह व्रत उनका सौभाग्य 'अचल' करता है (अखंड सौभाग्यवती), और पुरुषों को इससे आरोग्य, यश और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। जो लोग बीमार या वृद्ध हैं, वे पूर्ण उपवास की जगह केवल अरुणोदय स्नान और बिना नमक का भोजन करके भी पूरा पुण्य पा सकते हैं।





