विस्तृत उत्तर
यह साधना केवल आत्मिक उत्थान, आरोग्य और लोक कल्याण के सात्त्विक उद्देश्य से ही की जानी चाहिए।
निम्नलिखित तामसिक उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग वर्जित है:
- ▸वशीकरण
- ▸उच्चाटन
- ▸मारण
- ▸शत्रु नाश
यदि साधना का उद्देश्य नकारात्मक होगा, तो दंडनायक भैरव द्वारा साधक को स्वयं दंडित किया जा सकता है।





