विस्तृत उत्तर
एकादशी के दिन चावल खाना पूर्णतः वर्जित माना गया है। इसके पीछे पौराणिक कथा (पापपुरुष का वास) के साथ-साथ एक गहरा वैज्ञानिक कारण भी है। विज्ञान के अनुसार, चावल में जल (पानी) को सोखने की क्षमता बहुत अधिक होती है। एकादशी के दिन चंद्रमा के प्रभाव से शरीर के जलीय तत्व पहले से ही प्रभावित रहते हैं। ऐसे में चावल खाने से शरीर में पानी का असंतुलन हो सकता है, जिससे मन चंचल और अशांत हो जाता है और व्रत का मुख्य उद्देश्य 'इंद्रिय निग्रह' (मन को काबू करना) टूट जाता है।





