विस्तृत उत्तर
एकादशी व्रत केवल शरीर का उपवास नहीं, बल्कि मन का भी उपवास है। इस दिन सोना (दिवा-निद्रा) या रात में सोना 'व्रत भंग' के समान माना गया है। साधक को पूरी रात जागकर (रात्रि जागरण) भजन-कीर्तन करना चाहिए। मानसिक शुद्धि के नियमों के तहत किसी की बुराई (परनिंदा) करना, झूठ बोलना, गुस्सा (क्रोध) करना और कामुक विचार रखना भी 'मानसिक व्रत भंग' की श्रेणी में आता है और इससे व्रत का सारा पुण्य नष्ट हो जाता है।



