विस्तृत उत्तर
हाँ, स्त्रियाँ शनिवार का व्रत कर सकती हैं। 'धर्मसिंधु' के आशौच प्रकरण के अनुसार, मासिक धर्म (रजस्वला) के दिनों में स्त्रियाँ शारीरिक क्षमता होने पर व्रत (उपवास) तो रख सकती हैं, परन्तु उनके लिए पूजा करना, मूर्ति को स्पर्श करना या मंदिर में प्रवेश करना पूर्णतः वर्जित है। वे मन ही मन में शनि मंत्र का मानसिक जप कर सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि उन अशुद्धि के दिनों की गिनती संकल्पित व्रत संख्या (जैसे 11 या 19) में नहीं की जाती है, उन व्रतों की पूर्ति के लिए आगे के शनिवार जोड़े जाते हैं।





