का सरल उत्तर
हाँ, वे व्रत (उपवास) रख सकती हैं और मन में मंत्र पढ़ सकती हैं। लेकिन पूजा करना, मूर्ति छूना या मंदिर जाना सख्त मना है। इन दिनों के व्रत को कुल व्रत की गिनती में नहीं जोड़ा जाता।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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