विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, परिवार में जन्म या मृत्यु के कारण लगने वाले अशौच काल (सूतक-पातक) में भी एकादशी के व्रत का त्याग नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में व्यक्ति को अन्न छोड़कर 'मानसिक रूप से' व्रत का पालन करना चाहिए। हालांकि, सूतक-पातक के दौरान भगवान की प्रतिमा (मूर्ति) का स्पर्श करना और प्रत्यक्ष पूजा-अनुष्ठान करना वर्जित होता है।

