विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में समय को लेकर कड़ा निषेध है कि रात्रि में या संध्या काल में श्राद्ध कर्म कभी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से वह 'राक्षसी श्राद्ध' की श्रेणी में आता है और अर्पित किया गया अन्न-जल पितरों तक नहीं पहुँचता, बल्कि नकारात्मक शक्तियां उसे ग्रहण कर लेती हैं।





