विस्तृत उत्तर
शास्त्र मानवीय अक्षमताओं का ध्यान रखते हैं। अशक्त (रोगी, वृद्ध, बालक, गर्भवती महिलाएँ) पूर्ण उपवास न कर पाने पर एक समय सात्विक भोजन (फलाहार) या जल/दूध पीकर व्रत कर सकते हैं। ऋतुकाल (मासिक धर्म/Periods) के दौरान भी स्त्रियाँ व्रत रख सकती हैं। उन्हें बस इतना ध्यान रखना है कि वे भगवान की मूर्ति का स्पर्श या प्रत्यक्ष पूजा नहीं करेंगी, परंतु वे मानसिक रूप से भगवान का ध्यान और मंत्रों का जाप निरंतर कर सकती हैं।


