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दुर्गा मंत्र प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

दुर्गा मंत्र से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

नवार्ण मंत्र का जप नवरात्रि में कैसे करें?

प्रतिपदा संकल्प। 108/दिन (न्यूनतम), 1008 उत्तम, ~13,889 (सवा लाख/9 दिन)। लाल आसन, स्फटिक माला। सप्तशती: कवच→अर्गला→कीलक→नवार्ण→अध्याय। नवमी: हवन+कन्या पूजन।

नवार्णनवरात्रिजप
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दुर्गा सप्तशती के बीज मंत्र क्या हैं और इन्हें कैसे जपें?

ऐं = सरस्वती (ज्ञान), ह्रीं = लक्ष्मी (ऐश्वर्य), क्लीं = काली (शक्ति)। संयुक्त: 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (नवार्ण)। 108 बार, स्फटिक माला।

बीज मंत्रसप्तशतीजप
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नवार्ण मंत्र 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का जप कैसे करें?

'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — 9 अक्षर। ऐं=सरस्वती, ह्रीं=लक्ष्मी, क्लीं=काली। 108/1008 बार, स्फटिक माला। गुरु दीक्षा उत्तम। सप्तशती का मूल मंत्र। अनुष्ठान: सवा लाख + हवन।

नवार्ण9 अक्षरबीज मंत्र
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नवार्ण मंत्र की साधना कैसे करें — विधि सहित?

'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — सवा लाख 40 दिन (~29 माला/दिन)। स्फटिक माला, लाल आसन, ब्रह्ममुहूर्त। सात्विक+ब्रह्मचर्य। समापन: हवन (1/10) + कन्या भोजन + दान।

नवार्णसाधनाविधि
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दुर्गा मंत्र 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जप कैसे करें?

'ॐ दुं दुर्गायै नमः' — 108/1008 बार। रुद्राक्ष/स्फटिक माला। लाल आसन, पूर्व/उत्तर मुख। मंगलवार/शुक्रवार/नवरात्रि। 'दुं' = बीजाक्षर। अनुष्ठान: सवा लाख + हवन। शत्रु नाश, भय निवारण।

दुर्गा मंत्रॐ दुंजप
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दुर्गा मंत्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दुर्गा मंत्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दुर्गा मंत्र को गहराई से समझने का तरीका

दुर्गा मंत्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।