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पाप एवं दंड प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

पाप एवं दंड से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

परस्त्रीगमन करने वाला नपुंसक क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार परस्त्रीगमन करने वाला नरक-भोग के बाद नपुंसक योनि पाता है — जिसने जिस शक्ति का दुरुपयोग किया, वह शक्ति ही अगले जन्म में उससे छिन जाती है।

परस्त्रीगमननपुंसकगरुड़ पुराण
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ब्रह्महत्यारा, गाय-हत्यारा और कन्या-हत्यारा — तीनों चांडाल योनि में क्यों जाते हैं?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार ये तीनों — ब्राह्मण, गाय और कन्या — धर्म के स्तंभ हैं। इन तीनों की हत्या समान गुरुता के पाप हैं, इसलिए तीनों हत्यारों को नरकभोग के बाद समान रूप से चांडाल योनि का दंड मिलता है।

ब्रह्महत्यागोहत्याकन्या हत्या
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ऋण लेकर न लौटाने वाले की क्या गति होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार ऋण लेकर न लौटाने वाला वैतरणी नदी में गिरता है। यमलोक में उसका मांस काटकर ऋणदाता को दिया जाता है और उसे रौरव नरक की यातना भोगनी पड़ती है।

ऋणकर्जवैतरणी
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वाद-विवाद में ब्राह्मण को पराजित करने वाला ब्रह्मराक्षस क्यों बनता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार अहंकार या दुर्भाव से ब्राह्मण को वाद-विवाद में पराजित करने वाला जलविहीन वन में ब्रह्मराक्षस बनता है। यह ब्रह्मतेज के अपमान का दंड है।

ब्रह्मराक्षसब्राह्मणवाद-विवाद
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स्त्री हत्या और गर्भपात करने वाला पुलिन्द (भील) क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार स्त्री-हत्यारा और गर्भपात कराने वाला नरकभोग के बाद पुलिन्द (भील) योनि में जन्म लेता है और रोगग्रस्त रहता है। इसके पहले तप्तसूर्मि नरक में गर्म सुइयों से दंडित किया जाता है।

स्त्री हत्यागर्भपातपुलिन्द
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महापापी की पहचान क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार महापापी की पहचान उसके शरीर के चिह्नों से होती है — ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी, गोघाती कुबड़ा, मद्यपान करने वाले के दाँत काले, गुरु-अपमानकर्ता मिरगी का रोगी और परस्त्रीगामी नपुंसक होता है।

महापापीपाप चिह्नगरुड़ पुराण
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महापाप से सरीसृप और कीट योनि कैसे मिलती है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार स्वर्ण-चोरी से कीट-पतंग योनि मिलती है, भूमि-हरण से विष्ठा का कीड़ा बनना पड़ता है, और घोर महापापी नरकभोग के बाद साँप-छिपकली जैसी सरीसृप योनि में जन्म लेते हैं।

महापापसरीसृप योनिकीट योनि
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पाप एवं दंड — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पाप एवं दंड श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पाप एवं दंड को गहराई से समझने का तरीका

पाप एवं दंड प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।